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दिसम्बर में होगा पहला दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह

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सौ साल की हो गयी दिल्ली और सौ साल का हो गया भारतीय सिनेमा भी. इसी वर्ष दिल्ली को भी  दिसम्बर में उसका अपना पहला ‘अंतरराष्टीय फिल्म समारोह’ मिल जाएगा.

गौरतलब है कि आजादी के पैंसठ सालों के बाद आज तक राजधानी दिल्ली में कभी भी कोई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह दिल्ली के अपने  नाम से नहीं हुआ. इसकी एक वजह यह भी रही कि अब गोवा में आयोजित होने वाला भारत का अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह कुछ साल तक पहले दिल्ली में ही आयोजित होता था.

कुछ समय के बाद यह फिल्म समारोह एक साल दिल्ली में और एक साल देश के किसी दूसरे शहर में आयोजित किया जाने लगा.  बाद में  जब यह समारोह पूरी तरह से गोवा स्थान्तरित कर दिया गया तो राजधानी दिल्ली विश्व सिनेमा और उसके फिल्मकारों से कट गयी. लेकिन अब २१ दिसम्बर से २७ दिसम्बर २०१२ तक सीरी फोर्ट और एन डी एम् सी कन्वेंशन सेंटर में होने वाले दिल्ली के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की शुरुआत होने से  दिल्ली अंतरराष्ट्रीय सिनेमा और फिल्मकारों से खुद ब खुद  ही जुड जायेगी .

‘पान सिंह तोमर’ जैसी सफल फिल्म बनाने वाले और फिल्म ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ में महत्वपूर्ण भूमिका कर चुके मशहूर युवा फ़िल्मकार व अभिनेता तिगमांशु धूलिया ने दिल्ली के ललित होटल में ‘२१ दिसम्बर से २७ दिसम्बर २०१२ तक सीरी फोर्ट’ में होने वाले इस फिल्म समारोह की बाकायदा घोषणा की और समारोह की वेब साईट को लॉन्च किया. इस अवसर पर धूलिया ने कहा कि, “दुनिया के लन्दन, टोकियो, डरबन, बीजिंग जैसे दूसरे बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी करीब ढाई हजार फिल्म समारोह हैं. हमारे यहाँ भी मुंबई, गोवा, त्रिवेंद्रम और कोलकाता जैसी जगहों पर फिल्म समारोह हैं लेकिन दिल्ली जो कि देश की राजधानी है अभी तक ऐसे फिल्म समारोह से महरूम थी.”

राजधानी में एक हफ्ते तक चलने वाले इस फिल्म समारोह में दुनिया भर के ७० देशों की लगभग १५० फ़िल्में दिखाई जाएँगी. मशहूर मलयालम फ़िल्मकार और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता फ़िल्मकार अदूर गोपाल कृष्णन इस फिल्म समारोह के सलाहकार मंडल के अध्यक्ष हैं. इस सलाहकर मंडल में भारत से अनुराग कश्यप, तिग्मांशु धूलिया, श्रीराम राघवन, उमा ड कुनाह, अभिनेता शाइनी आहूजा, सुषमा पारचा, यशपाल शर्मा,शोनाली बोस,बेला नेगी, फ़्रांस के एलन जलादू, फिलिप जलादू, पाकिस्तान के जमाल शाह, सतीश आनंद, बंगला देश के सेजुदर रहमान फ़िरोज़, इरान के रेजा देगाती, जोराहे जोमानी, अमेरिका से आंद्रेज करावोकोसकी, इजरायल के अव्नेर फेंगुलेरेंट, इरेज पेरी, सीरिया से लीना मुराद, लन्दन से काई साईं ताई और टीवी के अलावा देश और विदेश के करीब ८० कलाकार और कई फिल्म निर्माता इसके अलावा फिल्म समारोह के अध्यक्ष वरिष्ठ फिल्म पत्रकार रामकिशोर पारचा, उपाध्यक्ष मशहूर युवा फ़िल्मकार संजय सिंह और समारोह के सचिव कश्मीरी फ़िल्मकार सुरेश के गोस्वामी भी शामिल होंगे.

दिल्ली के इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में दस श्रेणी रखी गयी हैं जिनमे चुनी गयी फिल्मों में से सर्वश्रेठ फिल्मों को क्रमश गोल्डन मीनार और सिलवर मीनार जैसे अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा. यही नहीं, समारोह के इस पहले संस्करण में न केवल  फिल्मों, फिल्मकारों, कलाकारों, कलाकृतियों और लेखकों को ही सम्मानित नहीं किया जायेगा बल्कि दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में रचनात्मक और सामाजिक कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए मीनारे दिल्ली नाम का प्रतिष्ठित सम्मान भी दिया जायेगा. इस साल फिल्मों, रंगमंच और कला की दुनिया में अपने जीवन के सौ वर्ष पूरे कर चुकी अदाकारा जोहरा सहगल को यह पुरस्कार दिया जायेगा.

इस फिल्म समारोह में  श्रधांजली खंड में  देव आनंद और बलराज साहनी व पुनरावलोकन खंड में अदूर गोपाल कृष्णन व बंगला के वरिष्ठ अभिनेता सौमित्र चटर्जी की फ़िल्में दिखाई जायेंगी.

समारोह के निदेशक पारचा का मानना है कि वे इसे केवल एक फिल्म समारोह ही नहीं बनाना चाहते बल्कि इसे दुनिया भर के चित्रकारों और लेखकों से भी जोड़ देना चाहते हैं. इसलिए दिल्ली के इस फिल्म समारोह में प्रवासी फिल्मकारों के लिए अलग से खंड भी रखा गया है जिसमे दुनिया भर में रह रहे प्रवासी फिल्मकारों की करीब १५ नयी फ़िल्में दिखाई जाएँगी. इस खंड में प्रवासी महिला फिल्मकारों को विशेष रूप से शामिल किया गया है जिनमे सिंगापुर में रहने वाली संगीता नाम्बियार की दी ग्रान प्लान, न्यूयार्क में रह रहे अभिनव शिव तिवारी की ओस, कनाडा के जय बजाज की दी हैप्पी पल्स, अरब अमीरात में रहने वाली फौकिया अख्तर की चिल्ड्रन्स ऑफ़ गौड़ जैसी फ़िल्में दिखाई जायेंगी. इस  खंड में शामिल फिल्मों में से सर्वश्रेष्ठ फिल्म को गोल्डन मीनार अवार्ड दिया जायेगा.

प्रवासी फिल्मों के साथ ही प्रवासी भारतीय लेखकों के लिए भी समारोह में एक खंड विशेष रूप से शामिल किया गया है जिसके तहत कवियों की पुस्तक का विमोचन व सर्वश्रेठ कविता को सिल्वर मीनार अवार्ड दिया जायेगा. अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाली वरिष्ठ पत्रकार, कवियत्री और लेखिका अनीता कपूर इसकी संपादक होंगी. इस अवसर पर विभिन्न विषयों पर सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जायेगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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