धवल और आरती बने ‘खतरों के खिलाड़ी टौर-4’ के चैम्पियन, लेकिन दर्शकों का रिस्पॉन्स रहा फीका

admin
Read Time:2 Minute, 39 Second
आरती छाबड़़िया और धवल ठाकुर

कलर्स टीवी पर प्रसारित हुए रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी – सीजन -4 यानि टौरचार में बॉलीवुड अभिनेत्री आरती छाबड़िया और मॉडल धवल ठाकुर की जोड़ी विजेता बन गई है। शनिवार को प्रसारित इस शो के फाइनल में दोनों ने आखिरी स्टंट को अपनी प्रतिद्वंदी जोड़ी से लगभग आधे समय में पूरा कर अपनी जीत पक्की की।

इस शो में इस बार 13 हसीनाओं और उनके पार्टनरों ने हिस्सा लिया था। सुपर मॉडल डायन्ड्रा सॉरेस के साथ थे आहरण चौधरी और वीजे मिया का साथ संग्राम सिंह ने दिया था। बोल्ड एंड सेक्सी कश्मीरा शाह का साथ दिया था सुमित सूरी ने जबकि उनकी खास दोस्त और बड़बोली के नाम से टीवी जगत में मशहूर संभावना सेठ का साथ दिया था स्टंटमैन खालिद चौधरी ने। प्रसिद्ध रोडी वी.जे. बानी का साथ अमित मेहरा ने दिया था और महिला क्रिकेटर अंजुम चोपड़ा के साथ थे संदीप सचदेव। भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप जीतने पर कपड़े उतारने के लिए बेकरार पूनम पांडे ने भी इस शो में प्रवीण जैन के साथ हिस्सा लिया था, लेकिन किसी की भी दाल नहीं गल पाई। आखिरी राउंड तक पहुंची इंडियन शकीरा कहलाने वाली मौली दवे और धीरज आमोनकर की जोड़ी जिसे रनर्स का ओहदा मिला।

इनके अलावा शो में दीना सिंह-अमित मेहरा, एलिसिया राउत-शाश्वत सेठ, अश्का गोर्डिया-सुनीत भाटिया, स्मिता बंसल-सौरभ रॉय भी नजर आए, लेकिन दर्शकों का रिस्पॉन्स कुछ फीका ही रहने की खबर है। हालांकि इस सीजन में यह शो पहले की तुलना में ज्यादा खतरनाक था और प्रतियोगियों के लिए यह किसी टार्चर से कम नहीं था। उन्हें शारीरिक और मानसिक स्तर पर ज्यादा कठिन चुनौतियों का मुकाबला करना पड़ा। शो की पूरी शूटिंग दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में हुई थी।

0 0

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments
No tags for this post.

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

जन लोक पाल की ही नहीं, जरुरत है जन राज्य की भी

।। सुनील दत्ता ।। लोक पाल विधेयक का अंतिम मसौदा क्या बनता है। वह भी बन पाता है या नही? फिर बनने के बाद संसद में पास हो पाता है या नही? विधेयक की शक्ल ले पाता है या नहीं जैसे सवाल भविष्य के गर्त में है। लेकिन इसमें एक […]
Facebook
%d bloggers like this: