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इन बाप-बेटों का घर क्यों नहीं घेरते केजरीवाल..?

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– सतीश चन्द्र मिश्र 
पिछले डेढ़ सालों से किसी उजड्ड गंवार चरवाहे की तरह हाथ में जनलोकपाली लट्ठ ले के केजरीवाल ने ईमानदारी को अपने घर की भैंस की तरह मनमाने तरीके से हांकने की ही जिद्द की है.
रविवार को जिस कोयला घोटाले की आड़ में गडकरी का घर घेरने की धमकी केजरीवाल ने दी है, वह धमकी केजरीवाल की तथाकथित ईमानदारी के दोगले-दोहरे चरित्र-चेहरे का शर्मनाक उदाहरण है.
सीएजी द्वारा कोयला घोटाले में 142 कोयला खदानों को मनमाने तरीके से आबंटित करने की जिस सरकारी प्रक्रिया पर उंगली उठा के देश को लगभग 1.86 लाख करोड़ का चूना लगने की सनसनीखेज सच्चाई से परिचित कराया है.
कुछ वर्ष पूर्व ठीक उसी प्रक्रिया से उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार ने कुछ ख़ास लोगों और कम्पनियों को नोयडा में सैकड़ों करोड़ के फ़ार्महाउस कौड़ियों के मोल आवंटित कर दिए थे.
जिस नोयडा में सरकार का न्यूनतम सर्किल रेट जब 18000 रुपये प्रति वर्ग मीटर था (बाज़ार दर तो इससे कई गुना अधिक थी) तब माया सरकार ने 10,000 वर्ग मीटर प्लॉट वाले 150 फार्महाउस 3.5 करोड़ रुपये में आबंटित कर दिए थे, इसमें भी सुविधा ये दी थी की प्लॉट पाने वाले को प्रारम्भ में केवल 35 लाख रुपये देने थे शेष राशि 16 मासिक किस्तों में चुकानी थी.
जबकि गौर करिए कि न्यूनतम सरकारी सर्किल रेट से ही इन प्लॉटों का मूल्य 18 करोड़ रुपये बनता था, बाज़ार दर से तो इन प्लॉटों की कीमत इससे बहुत अधिक थी. लेकिन माया सरकार ने कृषि कार्य के नाम पर इस कारनामे को अंजाम दिया था.
इन 150 प्लॉटों में से 120 तो निजी कम्पनियों को दिए गए थे और 29 प्लॉट निजी व्यक्तियों को. कमाल देखिये कि इन परम भाग्यशाली 29 व्यक्तियों में शान्ति भूषण और उनके सुपुत्र जयंत भूषण भी शामिल थे.
इस भयंकर फार्महाउस जमीन घोटाले का मामला अब इलाहबाद हाईकोर्ट में है. कुछ सप्ताह पूर्व प्रदेश सरकार को सौंपी गयी अपनी जांच रिपोर्ट में नोयडा अथारिटी के चेयरमैन राकेश बहादुर ने इस फार्महाउस घोटाले से सरकार को 1000 करोड़ की चपत लगने की बात कही है. कुछ दिनों पूर्व ही उत्तरप्रदेश सरकार ने इस पूरे घोटाले की जांच लोकायुक्त को भी सौंप दी है.
अतः कोयला घोटाले के नाम पर नेताओं का घर घेरने को आतुर हो रहे केजरीवाल को इन भूषणों का घर क्यों नहीं दिख रहा…?
ध्यान रहे कि, गरीब किसानों की जमीन को जबरिया अधिग्रहित करने के बाद इस फार्महाउस घोटाले की लूट से सरकारी खजाने को जो 1000 करोड़ रुपये की चपत लगायी गयी थी वो रुपये किसी केजरीवाल या किन्हीं भूषणों की बपौती नहीं थे.
इसके बजाय ये 1000 करोड़ रुपये गरीब किसानों के खून पसीने से सींची गयी जमीन के थे.
अतः क्या फर्क है कोयला घोटाले तथा फार्महाउस घोटाले के दोषियों में..?
फर्क केवल रकम और अवसर का है, नीयत और नीति का नहीं क्योंकि जिसको जितना अवसर मिला उसने उतना हाथ साफ़ किया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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16 thoughts on “इन बाप-बेटों का घर क्यों नहीं घेरते केजरीवाल..?

  1. तो चरणदास चोर भारत भूमि में एक आम आदमी के घर में आम आदमी के शिशु की भांति किलकारी भरते हुए पैदा हुए। उनका पालन-पोषण भी आम आदमी की भांति हुआ। भगवान की अनुकंपा और स्वर्गीय भारतीय महापुरुषों के आशीर्वाद की वजह से चरणदास बचपन से ही मेधावी निकले। मां-बाप ने नए चलन के हिसाब से उनका नामकरण किया। वे नए नाम से जाने गए। मेधावी होने की वजह से उन्हें उच्च संस्थान में पढ़ने का मौका मिला। सरकारी वजीफे ने उनकी आर्थिक समस्या का हल कर दिया। पढ़ने के बाद वे उच्च नौकरी के लिए चुन लिए गए। वे नौकरी में रम ही रहे थे कि स्वर्ग से मैसेज मिला कि जिस काम से गए हो, वो अब करो। चरणदास नए अवतार में नौकरी पर चरण प्रहार करते हुए आम आदमी के बीच आ गए। पूर्व जन्म की भांति एक गुरु का चयन किया। गुरु ने पहला संकल्प दिलवाया- जनता के लिए लड़ना, लेकिन न राजनीति करना और न राजनीति में जाना। गुरु ने शिष्य को आगे करके एक बड़ा प्रभावशाली आंदोलन चलाया। इस आंदोलन से चेला छा गया। चेला को लगा कि गुरु तो धेला भर का है, असली तो मैं हूं। गुरु द्वारा दिलाए गए संकल्प पर चरण प्रहार करते हुए चेले ने राजनीति भी करनी शुरू कर दी और पार्टी भी बना ली। चूंकि चेला था तो ईमानदार और हृदय में चरणदास जैसा दृढ़ संकल्प, इसलिए आम आदमी उसे अपना हीरो मानने लगे। चेले की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर लग गई।

    ये नजर किसी तांत्रिक की मूठ से कम घातक नहीं थी। चुनाव हुआ तो वह कुर्सी उसी तरह मुरझा गई, जैसे कि तांत्रिक मूठ से हराभरा पेड़ मुरझा जाता है। चेले की पार्टी ने चुनाव में आम आदमी को रियायतों का ऐसा सब्जबाग दिखाया कि सामने वाली पार्टी सूखे पत्ते की तरह उड़ गई। जो पत्ते राजपथ पर पड़े भी मिले, उस पर तबियत से झाडू फेर दिया गया। फिलहाल कथा को यही विश्राम देंगे, क्योंकि इस चरणदास के आगे गहरा धर्मसंकट आ गया है- पहला, गुरु के संकल्प की भांति जनता के प्रति संकल्पों पर चरण प्रहार कर उनसे हाथ मिला ले, जिनसे लड़ने के लिए उसे स्वर्ग से यहां भेजा गया था या फिर जनता के साथ संकल्पों की माला भजते हुए खड़ा रहे। अब क्या किया जाए, यही तो धर्मसंकट है।

  2. लेखक सतीश मिश्र को धन्यवाद जिन्होंने इस टीम के दो नामी गिरामी चेहरों की एक और भ्रष्टाचारी हरकत को उजागर किया.
    इन बाप बेटों की वो सीडी सामने भी आ चुकी है और उसकी फोरेंसिक रिपोर्ट में वो सीडी सही भी साबित हो चुकी है.
    इसके अलावा इस शांतिभूषण को बाकायदा अदालत ने धोखाधडी करके स्टैम्प ड्यूटी चोरी करने का दोषी घोषित किया है.
    ये लिंक क्लिक करके इस सच्चाई को पढ़ा जा सकता है.
    http://www.bhaskar.com/article/UP-OTH-court-decision-on-shanti-bhushan-will-come-today-2718642.html?LHS-
    इसलिए जब इतने बेईमान और चोर किस्म के लोग जब ये दावा करते हैं की हम देश में ईमानदारी की गंगा बहायेंगे तब हँसी आती है और इनको देखकर साधू के भेष में घूमने वाले शैतानों के किस्से याद आने लगते हैं.

  3. Yogesh Bajpai योगेश बाजपेयी तुम्हारे तिलमिलाने और बौखलाने से इस गैंग की करतूतों का सच छुप नहीं जाएगा. इस रिपोर्ट में अन्ना गैंग के बाप-बेटों की जो करतूत उजागर हुई है वो तुम्हारे जैसे चूतियों के तिलमिलाने बौखलाने से ढंक नहीं जायेगी.
    रिपोर्ट में उजागर हुई सच्चाई को झूठा सिद्ध करते तो तुम्हारी तिलमिलाहट का कोई अर्थ होता, लेकिन तुम तो सिर्फ तिलमिला कर लेखक को ही गाली बकने लगे इससे यह पता चल रहा है कि तुम कितने अकलमंद.? कितने ईमानदार.? और कितने सच्चे.? हो.

  4. तिवारी जी अन्ना टीम के समर्थन में आपने बहुत ज्ञान-ध्यान की बातें की लेकिन इस लेख में उसी टीम के दो मेन गुर्गों के भयंकर भ्रष्टाचार की कहानी विस्तार से दी गयी है, उसका कोई जवाब आपको नहीं सूझा.
    केजरीवाल किस तरह खुद लिए गए सरकारी कर्जे की बात को 5 साल तक झुठलाता रहा और फिर जब घर की कुर्की की नोटिस मिली तो उस कर्जे को अपनी दुम दबाकर चुका आया ये पूरे देश ने देखा है. आपको पता नहीं है तो अपनी आधी-अधूरी- अधकचरी जानकारी दुरुस्त करिए. और थोथे-झूठे उपदेशों से लोगों को बरगलाना बंद करिए.
    लेखक ने लेख के अंत में स्पष्ट भी किया है कि सरकार और इस अन्ना गैंग की चोरी में फर्क केवल रकम का है. नीति और नीयत का नहीं.
    इनको छोटा मौका मिला तो ये उसी में लूटपाट करने लगे.

  5. Mishraji, BJP ka virodh na karne tak team Anna sahi thi. Kya BJP ne Lok sabha mein desh saansadon ki ekta ka raag aplaap kar theek kiya tha? Kya kuchh sansad aparadhi nahin hain? Un saansadon ke sansad mein upasthit hone se kya sansad ki garima kam nahin hoti? Agar janta ka koi aadami sach kahe to sansad ki garima kaise kam ho jaati hai? Sansad to ek pavitra sthan hai. Kya isse pavitra rakhna BJP ki ya anya rajnitik dalon ki jimmevari nahin hai? Kya BJP is jimmevari ko vakai nibha rahi hai? Apne dil parhaath rakh kar iimandari se socho. BJP ke viruddh tamaam saboot hain beiimani ke. Arvind Kejriwal ke khilaf abhi nahin hain. Jis din honge, janta Kejriwal ko bhi bhula degi. RAJNITI KA UPYOG SWARTH KE LIYE NAHIN, DESH-HIT KE LIYE HONA CHAHIYE. KYA BJP KAR RAHI HAI? YADI AAP KAHTE HEIN "HAAN" TO AAP SACH NAHIN BOL RAHE HAIN. SOCHIYE HAM KAHAN JAA RAHE HEIN. AANE WALI PIRHI HAM PAR THOOKEGI NAHIN KYA HAMARI INHARQATON KE LIYE?

  6. mishra ji yeh bataiye ki yeh aarop lagane ki liye aapke kitne paise Khangrase se liye hi, aap jaise desh drohiyo ki wajah se hi desh me koi sahi shuruwat nahi ho paati, agar aapke pet me itna hi drad tha to us samaye aap kya kar rahe the, khud to kuch sahi kar nahi sakte aur agar koi karne chle to uski tang pakar ke keechte hi, sharm aani chahiye aapko.

    Yogesh Bajpai 07275021111

    1. वैसे योगेश बाजपेई तुम ये बताओ कि तुमको इस अन्ना गैंग ने कितने पैसे दिए हैं इनके कुकर्मों के पक्ष में चिल्लाने के लिए.
      योगेश बाजपेयी तुम्हारे तिलमिलाने और बौखलाने से इस गैंग की करतूतों का सच छुप नहीं जाएगा. इस रिपोर्ट में अन्ना गैंग के बाप-बेटों की जो करतूत उजागर हुई है वो तुम्हारे जैसे चूतियों के तिलमिलाने बौखलाने से ढंक नहीं जायेगी.
      रिपोर्ट में उजागर हुई सच्चाई को झूठा सिद्ध करते तो तुम्हारी तिलमिलाहट का कोई अर्थ होता, लेकिन तुम तो सिर्फ तिलमिला कर लेखक को ही गाली बकने लगे इससे यह पता चल रहा है कि तुम कितने अकलमंद.? कितने ईमानदार.? और कितने सच्चे.? हो.

  7. mishra ji yeh bataiye ki yeh aarop lagane ki liye aapke kitne paise Khangrase se liye hi, aap jaise desh drohiyo ki wajah se hi desh me koi sahi shuruwat nahi ho paati, agar aapke pet me itna hi drad tha to us samaye aap kya kar rahe the, khud to kuch sahi kar nahi sakte aur agar koi karne chle to uski tang pakar ke keechte hi, sharm aani chahiye aapko.

    Yogesh Bajpai 07275021111.

  8. अन्ना गैंग के गुर्गों को जूतों की ही भाषा समझ में आती है,
    अशांत प्रदूषण पर जब से जूतों के साथ-साथ लात घूंसों की मूसलाधार बारिश हुई है तब से उस हरामखोर ने पाकिस्तानी राग में "कश्मीर गीत" गाना बंद कर दिया है.
    इसके गैंग के ex गुर्गे 'भंगी'वेश पर जबसे अहमदाबाद में जूते चले हैं तब से उसने 'राक्षसी' शैली में अपने मुंह से भगवान शिव विरोधी मलमूत्र त्यागना बंद कर दिया है.
    इसके गुर्गे खुजलीवाल पर लखनऊ में जूता चला तो अपने एलानिया दावों के बावजूद विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला, कुत्तों की तरह दम दबाये रहा.
    खुद खूंसट किशन बाबूराव के गाँव पर चढ़कर इसे जुतियाने पहुंचे एनसीपी के कार्यकर्ताओं के जूतों के बरसने की आशंका के बाद से इस अनपढ़ गंवार ट्रक ड्राइवर ने शरदपवार का नाम लेना बंद कर दिया है….
    इस गिरोह से सम्बन्धित उपरोक्त उदाहरण चीख-चीख कर ये कह रहे हैं कि, ये पूरा गिरोह जूतों और लातों का भूत है बातों से नहीं मानेगा.
    इस ट्रकड्राइवर और इसके गुर्गों को जूतों की ही भाषा समझ में आती है

  9. अन्ना गैंग के गुर्गों को जूतों की ही भाषा समझ में आती है,
    अशांत प्रदूषण पर जब से जूतों के साथ-साथ लात घूंसों की मूसलाधार बारिश हुई है तब से उस हरामखोर ने पाकिस्तानी राग में "कश्मीर गीत" गाना बंद कर दिया है.
    इसके गैंग के ex गुर्गे 'भंगी'वेश पर जबसे अहमदाबाद में जूते चले हैं तब से उसने 'राक्षसी' शैली में अपने मुंह से भगवान शिव विरोधी मलमूत्र त्यागना बंद कर दिया है.
    इसके गुर्गे खुजलीवाल पर लखनऊ में जूता चला तो अपने एलानिया दावों के बावजूद विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला, कुत्तों की तरह दम दबाये रहा.
    खुद खूंसट किशन बाबूराव के गाँव पर चढ़कर इसे जुतियाने पहुंचे एनसीपी के कार्यकर्ताओं के जूतों के बरसने की आशंका के बाद से इस अनपढ़ गंवार ट्रक ड्राइवर ने शरदपवार का नाम लेना बंद कर दिया है….
    इस गिरोह से सम्बन्धित उपरोक्त उदाहरण चीख-चीख कर ये कह रहे हैं कि, ये पूरा गिरोह जूतों और लातों का भूत है बातों से नहीं मानेगा.
    इस ट्रकड्राइवर और इसके गुर्गों को जूतों की ही भाषा समझ में आती है.

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