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गीतिका शर्मा केस में पुलिस आइटम गर्ल नुपुर मेहता से भी पूछताछ करेगी…

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गीतिका शर्मा की आत्महत्या मामले की तह तक पहुँचने में जुटी दिल्ली पुलिस अब नुपूर मेहता से भी जल्द ही पूछताछ कर सकती है. पुलिस सूत्रों की माने तो बॉलीवुड मूवी ‘जो बोले सो निहाल’ में आइटम सांग कर चुकी नुपूर से पूछताछ में अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं. गौरतलब है कि नुपूर भी एमडीएलआर कंपनी में काम कर चुकी है और गोवा में गीतिका के ठहरने के दौरान दोनों का झगड़ा भी हो चुका है.  यही नहीं गोपाल कांडा ने अंकिता सिंह को गोवा में फ़्लैट दिलवा रखा था तो नुपुर मेहता को बंगलुरु में.  इससे पहले पुलिस जल्द ही अंकिता सिंह से भी पूछताछ करने की बात कह चुकी है. इसके बाद से अंकिता सिंह भूमिगत हो चुकी है.

वहीँ  दिल्ली पुलिस ने गीतिका आत्महत्या मामले में  हरियाणा के पूर्व गृह राज्यमंत्री गोपाल गोयल कांडा  पर अब आईटी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज कर लिया है. इससे पहले पुलिस उस पर आईपीसी की धारा 306,  506 और 120 बी  धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर चुकी है.

दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (लॉ एंड आर्डर) धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक हुई तफ्तीश में यह साफ हुआ है कि उसने फरार रहने के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सबूत जैसे हार्ड डिस्क, ई-मेल, एसएमएस आदि दस्तावेजों को नष्ट करने का प्रयास किया है. इसे देखते हुए अब उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया जा रहा है. यह पूछे जाने पर कि क्या ये सबूत अब नष्ट हो चुके हैं उनका कहना था कि हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं जिससे हम कांडा को दोषी साबित कर देंगे. हार्डडिस्क की फिलहाल एक्सपर्ट द्वारा जांच की जा रही है.

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अरुणा ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बताया था कि गीतिका की ज्वाइनिंग के महज एक माह पहले 2006 में एमडीएलआर एयरलाइंस में उसकी नियुक्ति हुई थी.

वहीं, कांडा की गिरफ्तारी के बाद बरामद की गई हार्ड डिस्क से मिले दस्तावेजों से इस बात की पुष्टि होती है कि अरुणा ने 50 हजार रुपए की तनख्वाह पर 2004 में बतौर महाप्रबंधक (समन्वय) एमडीएलआर एयरलाइंस में ज्वाइन किया था. अरुणा के ज्वाइनिंग लेटर पर एमडीएलआर में कार्यरत खुशबू शर्मा के हस्ताक्षर दर्ज हैं.

अभियोजन पक्ष ने बताया कि पुलिस पूछताछ में एमडीएलआर कंपनी में असिस्टेंट ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर के पद पर कार्यरत शिवरूप ने बताया था कि उसने ही अलबशीर एट याहू डाट कॉम नाम से फर्जी ई-मेल आईडी बनाई थी. इसी ई-मेल आईडी से उसने अरुणा द्वारा ड्राफ्ट एक ई-मेल गीतिका को भेजा था. इस ई-मेल में उसके वित्तीय बकाए का उल्लेख किया गया था. इसके अतिरिक्त, अभियोजन पक्ष ने बताया कि अरुणा अपने पिता के साथ मिलकर अरोमा फूड्स नामक एक कंपनी चलाती थीं. इस कंपनी का नाम मार्च 2012 में बदलकर एकेजी रख दिया गया. एकेजी का मतलब अरुणा, खुशबू और गीतिका था.

वहीं बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष की दलीलों पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि अरुणा की ज्वाइनिंग की तिथि का इस केस से कोई खास संबंध नहीं है. अरुणा अपनी कंपनी में कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत थी. उसका उच्च प्रबंधन द्वारा लिए गए निर्णयों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता था. अरुणा सिर्फ संदेशों के आदान-प्रदान और कोर्डिनेशन का कार्य देखती थी. अरोमा फूड्स का नाम बदलकर एकेजी करने का कांडा से कोई संबंध नहीं है. यह कंपनी तीन महिलाओं की आपसी सहमति से तैयार की गई थी. घटना से ढाई महीने पहले एमडीएलआर एयरलाइंस की ओर से गीतिका को एमबीए की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी. इस वित्तीय सहायता में किसी भी तरह का अनुबंध नहीं था, जिसमें वित्तीय सहायता के बदले कंपनी ज्वाइन करने की शर्त रखी गई हो. बचाव पक्ष ने कहा कि पुलिस उन्हीं बातों का उल्लेख कर रही है, जिनका जिक्र मामले की सुनवाई के पहले दिन हो चुका है.

बचाव पक्ष ने उच्च न्यायालय के कुछ फैसलों को आधार बनाते हुए कहा कि अदालत द्वारा खारिज की गई पुलिस कस्टडी की याचिका को तब तक स्वीकार नहीं किया जा सकता है, जब तक नई याचिका में किसी नए तथ्य और पुख्ता सबूतों का उल्लेख न किया गया हो.

दूसरी तरफ मीडिया में आ रही गीतिका शर्मा के चरित्रहीन होने की खबरों ने नाराज होकर गीतिका के परिजन मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग के दफ्तर पहुंचे. मृतका के भाई अंकित और मां का आरोप है कि पुलिस जांच के नाम पर उनके परिवार की बदनामी करने पर तुली है. पुलिस खुद मीडिया को ऐसी झूठी जानकारियां लीक करवा रही है, जिससे गीतिका का चरित्र हनन हो रहा है. जांच से जुड़ी जानकारी उन्हें देने के बजाए पुलिस मीडिया में जानकारी बांट रही है. इस पर दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (लॉ एंड आर्डर) धर्मेंद्र कुमार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पुलिस किसी भी तरह की जानकारी लीक नहीं कर रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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