क्या दरगाह दीवान को भी मिलेगा नजराने का हिस्सा?

tejwanig

हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के नजराने पर अब तक तो दरगाह कमेटी व खादमों की दोनों अंजुमनें दावा कर रही थीं, मगर ऐसा लगता है कि इस पर ख्वाजा साहब के वश्ंज दरगाह दीवान के हिस्से को लेकर भी विचार की स्थिति बन गई है। दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला की खबर को सही मानें तो जानकारी ये है कि दीवान जेनुल आबेदीन ने इस संबंध में पाक उच्चायोग को पत्र लिखा है।
समझा जाता है कि इसी के साथ दीवान के हिस्से पर भी पाक सरकार को विचार करने की स्थिति आ जाएगी। अब तक की स्थिति ये है कि दरगाह से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति सज्जादानशीन सैयद जैनुल आबेदीन अली खान को पाक उच्चायोग ने पूरी तरह नजरअंदाज किया है, जबकि दरगाह गुबंद के भीतर आने वाले किसी भी चढ़ावे पर सज्जादानशीन का 50 प्रतिशत अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि मजार पर आने वाले चढ़ावे को दो हिस्सों में बांटा जाएगा, जिसमें एक खादिमों का और दूसरा सज्जादानशीन का होगा। इस फैसले की रोशनी में अगर दीवान को हिस्सा नहीं दिया गया तो बाद में यह विवाद का रूप ले सकता है।
गौरतलब है कि दरगाह कमेटी केंद्र सरकार के अधीन है। लिहाजा इस विवाद को अल्पसंख्यक मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के समक्ष भेजा था, लेकिन विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में कोई भी राय देने से इनकार कर दिया।
ज्ञातव्य है कि जरदारी ने 8 अप्रैल को अपने पुत्र बिलावल के साथ हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत के समय दस हजार डालर (पांच करोड़ रुपये) नजराने के तौर पर देने की घोषणा की थी। पाक उच्चायोग इस राशि को 16 अगस्त को अजमेर जाकर देने का कार्यक्रम बना चुका है। उच्चायोग ने पाक राष्ट्रपति के नजराने को तीन भागों में विभाजित किया है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा गठित दरगाह कमेटी को 3.5 करोड़, अंजुमन सैयद जादगान को एक करोड़ तथा अंजुमन शेखजादगान को 50 लाख रुपये देना तय किया गया है। नजराने की राशि के इस तरह वितरण को खादिमों की दोनों अंजुमनों ने सिरे से खारिज कर दिया है। अंजुमन सैयद जादगान के सचिव वाहिद चिश्ती का कहना है कि गुंबद शरीफ के भीतर किसी भी तरह के नजराने पर सिर्फ खादिमों का हक है। दरगाह कमेटी को इसे लेने का कोई हक नहीं है। लिहाजा इस तरह के वितरण को वे किसी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।

-तेजवानी गिरधर

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