सुनियोजित साज़िश थी मुंबई हिंसा.. पाकिस्तानी झंडे लहरा रहे थे उपद्रवी….

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मुंबई हिंसा के दौरान उपद्रवी पाकिस्तानी झंडे लहराते हुए…

मुंबई में शनिवार को भड़की हिंसा को मुंबई पुलिस पूर्व नियोजित मान रही है. असम और म्यांमार में मुस्लिमों पर जारी हमलों के खिलाफ आजाद मैदान में रैली आयोजित करने वाले संगठनों रजा अकादमी और मदीना तुल इल्म फाउंडेशन पर अब मुंबई पुलिस हत्या का मुकदमा चलाएगी. पुलिस ने गिरफ्त में आए 23 उपद्रवियों समेत आयोजकों के खिलाफ धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. मुंबई पुलिस के हत्थे चढ़े असामाजिक तत्वों पर कई अन्य धाराओं में भी केस दर्ज किया गया है. क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त हिमांशु राय ने कहा है कि मुंबई पुलिस अधिनियम के तहत हिंसा और आगजनी से हुए नुकसान का हर्जाना भी रजा अकादमी से वसूला जाएगा.

दूसरी तरफ रजा अकादमी समेत अन्य संगठनों ने शनिवार की हिंसा के लिए मुंबई के निवासियों और मीडिया से माफी मांगी है. अकादमी के अध्यक्ष मुहम्मद सईद नूरी ने कहा, जिन लोगों ने हिंसा फैलाई, वे मुस्लिम नहीं हो सकते. कोई भी मुसलमान रमजान के पवित्र महीने में ऐसी हिमाकत नहीं कर सकता.

शनिवार की हिंसा को लेकर मुंबई पुलिस ने सख्त रवैया अख्तियार कर रखा है. हिमांशु राय ने कहा, हिंसा भड़काने वालों और उसके कारणों का पता लगाने के लिए क्राइम ब्रांच की 12 सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई है. आजाद मैदान में भड़काऊ भाषणबाजी को लेकर वीडियो फुटेज का अध्ययन किया जा रहा है. सीसीटीवी कैमरों के जरिए बाकी उपद्रवियों की शिनाख्त करने की कोशिश हो रही है. पुलिस ने गिरफ्तार उपद्रवियों को महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया. अदालत ने सभी असामाजिक तत्वों को 19 अगस्त तक पुलिस रिमांड में भेज दिया. रिमांड के लिए अदालत में दिए आवेदन में पुलिस ने हिंसा को पूर्व नियोजित कहा है. हिमांशु राय के अनुसार, जिस तरीके से आजाद मैदान रैली में पहुंचने के लिए फेसबुक और एसएमएस के जरिये संदेश भेजा गया, उससे साफ है कि हिंसा पूर्व नियोजित थी. सीसीटीवी फुटेज से साफ है कि कई प्रदर्शनकारी डंडों और लोहे की रॉड से लैस थे. गाड़ी फूंकने के लिए पेट्रोल कैन भी लेकर आए थे. उनका कहना था कि ऑनलाइन और एसएमएस संदेश भेजने वालों का पता लगाने के लिए साइबर क्राइम सेल की मदद ली जाएगी. राय के मुताबिक, रजा अकादमी और मदीना तुल इल्म फाउंडेशन ने रैली के लिए जब मंजूरी मांगी थी तो पुलिस को दिए आवेदन में केवल डेढ़ हजार लोगों के आजाद मैदान पहुंचने की बात कही थी. लेकिन शनिवार को वहां पर कहां से बीस हजार से अधिक लोग आ गए. यह सब पूर्व नियोजित प्रतीत होता है. इस बीच हिंसा के दौरान लूटी गई पुलिस की दो एसएलआर राइफलों को ठाणे के मुंब्रा में कूड़ेदान से बरामद कर लिया गया है. रविवार को वैसे पूरे महानगर में शांति रही, लेकिन पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम कर रखे हैं. गौरतलब हाई कि रजा अकादमी और सुन्नी जमायत उल उलेमा समेत 24 संगठनों द्वारा आयोजित रैली के दौरान हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई थी. 45 पुलिसकर्मी सहित सौ से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे.  यही नहीं भीड़ में कई लोग पाकिस्तानी झंडे भी लहरा रहे थे मगर परम्परागत मीडिया ने इस पर कोई तवज्जो नहीं दी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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6 thoughts on “सुनियोजित साज़िश थी मुंबई हिंसा.. पाकिस्तानी झंडे लहरा रहे थे उपद्रवी….

  1. Baki sab to nindniye hai par jhande wali baat nahi pachti hai.
    Bhai pakistani jahnde mein left hand side main ek safed patti bhi hoti hai wo to mujhe nahi dikhi isme …to ye jhanda pakistani kaise hua

  2. मित्रो,
    इसी से मिलती-जुलती घटना पटना मैं भी हुई थी, बरमेश्वर मुखिया जी के शव यात्रा के दौरान –आगजनी, हिंसा, तोड़फोड़ और मिडिया पर हमला, उस घटना के बाद बिहार पुलिस ने क्या किया यह सामने है , वही महाराष्ट पुलिस क्या कर रही है यह भी देखिये और तुलना कीजिये… सुशासन कहा है….

  3. bilkul sahee hai ki agar yeh apney desh ke logo ka haath hota to Amar Jyoti ko harm kayon pahuncha aur Paklistani Jhandy Lehraye gaye to medea kayon chup hai, kisi doosrey desh ki virodi sangthan kee shararat to 100% hai, Media bhi dabav main hai prantu kayon? Kaya Ajish hai?

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