अमर जवान ज्योति स्मारक भी तोड़ डाला मुंबई में उपद्रवियों ने…

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फेसबुक सही मायने में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मंच बनता जा रहा है, जिसके चलते परम्परागत मीडिया द्वारा उपेक्षित मगर महत्वपूर्ण ख़बरों को फेसबुक के जागरूक प्रयोगकर्ता अपनी वाल पर प्रकाशित कर देश और दुनिया में जागृति फैला रहें हैं. कल मुंबई में हुई हिंसा में उपद्रवियों द्वारा की गयी तोड़ फोड़ के दौरान परम्परागत मीडिया को सिर्फ अपनी ओबी वैन याद रहीं. मगर अमर जवान ज्योति स्मारक की तोड़ फोड़, जिसे परम्परागत मीडिया ने उपेक्षित कर दिया था लेकिन एक फेसबुकियन पवन अवस्थी ने अपनी वाल पर बतौर रपट पोस्ट किया है जिसे हम जस का तस प्रकाशित कर रहे हैं….

 

-पवन अवस्थी||

असम और म्यामार के मुस्लिमो के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान मुम्बई में देश के शहीदों के स्मृति स्थल पर हिंसक इस्लामी हमला …………..!!!

मुम्बई पर हुए 26/11 के हमले में शहीद देशभक्तों का स्मृति स्थल इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले से क्षतिग्रस्त ..

शान्ति और भाई चारे सहित गंगा जमुनी संस्कृति के बाहक शाति के अग्रदूतों का मुबई में कारनामा …..

बचपन से आज तक मैंने जितने भी मुलिम नेताओं , बुद्धिजीवियों .. मौलानाओ और सेकुलर किस्म बाले राजनेताओ के बयान सुने देखे या पढ़े है .. या फिर मजलिसो की तकरीरे . बयान आदि देखे . पढ़े और सुने है ..उन सब में इस्लाम के बारे में यही बताया गया की इस्लाम शांति, भाईचारे .. मेलमिलाप ,इन्सानी हुकूक .. बराबरी और देशभक्ति सहित .. मादरे वतन से प्यार करने बाला मजहब होने के साथ इंसानियत के उसूलों से सरावोर है .. और इस मजहब के अनुयायियो ने देश की तरक्की में बहुत बड़ा योगदान दिया है |

शहीदों की याद में बने इस स्मृति स्थल की बुझी हुई ..लौ .. क्या सच में इस बात का पैगाम दे रही है कि इस्लाम इंसानियत और भाईचारे सहित मादरेवतन से मोहब्बत सिखाने बाला धर्म है ?

……………लेकिन मुझे बहुत से सबालो के जबाब आज तक नहीं मिल पाए की …….अगर इस बात को मान लिया जाए तो ऐसी बाते बताने बाले ये जबाब क्यों नहीं देते की आजादी के बाद से आज तक मुस्लिम धर्म गुरुओ .. नेताओं .. बुद्धिजीवियों ने आज तक कभी भी देश की समस्याओं .. भ्रस्टाचार ..काले धन …. देश में बढ़ता आतंकबाद .. विष्फोटक होती जनसँख्या .. देश के सीमावर्ती राज्यों के सुरक्षा हालात .. चीन और पकिस्तान के खतरे .. बांग्लादेशी घुसपैठ ब भारत में अबैध रूप से रह रहे करोड़ी घुसपैठिये के मुद्दे एवं कश्मीर की इस्लामी हिंसा के द्वारा भगाए गाये पांच लाख कश्मीरी पंडितो के मुद्दे पर कोई राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन .. आंदोलन या धरने का आयोजन क्यों नहीं किया |

बर्मा .. ईरान ..ईराक फिलिस्तीन अफगानिस्तान सहित दूर दराज के मुस्लिम देशो में होने बाली छोटी या बड़ी घटनाओं पर भारत में तोड़फोड़ और हिंसक प्रदर्शन कर सरकारी ब निजी संपत्ति सहित जानमाल को नुकसान पहुचाने बाले लोग . कश्मीर के पांच लाख भारतीयों ब असम के बोर्डो के मुद्दे पर सन्नाटे में क्यों चले जाते है …………….क्यों जब बांगला देश या कश्मीर सीमा पर कोई सैनिक आतंकियों या इस्लामी घुसपैठियों के हांथो बीभत्स रूप से कत्ल किया जाता है .. तो इंसानी हुकूक ..देशभक्ति .. मादरे वतन से प्यार …. भाई चारा .. राष्ट्रवाद किस कोने में सोने चला जाता है |

मुंबई में पाकिस्तानी झंडा फहराते उपद्रवी

पिछले दो दिनों में बर्मा के मुद्दे पर देश के कई स्थानों में हिंसक प्रदर्शनों हुए.. रांची और जमशेदपुर में निर्दोष लोगो की दुकानों को जलाया गया ..आम भारतीयों पर हिंसक हमले किये गए . साथ ही जमशेदपुर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय पर हमला कर तीन पुलिस कर्मियों पर प्राणघातक हमला किया गया जिसमे एक असिटेंट सब इन्स्पेक्टर को MGM college and Hospital में भर्ती करना पड़ा .. इसके साथ ही मुम्बई के आजाद मैदान में प्रदर्शकारियो ने खुलेआम पकिस्तान के झंडे फहराए और उसके बाद मीडिया पर व्यापक रूप से हिंसक हमलों के साथ आगजनी की गयी कई पत्रकार और पुलिसकर्मी घायल हुए ………….और इन सब से जादा शर्मनाक और देशद्रोही हरकत ये की मुम्बई में पाकिस्तान प्रायोजित हमले में मारे गए शहीदो की याद में बनाए गए स्मृति स्थल को हमला कर क्षतिग्रस्त किया गया ………….. इन घटनाक्रमो पर मुस्लिम नेताओ .. धर्मगुरुओं .. बुद्धिजीवियों . सहित मुस्लिम पत्रकारों और उर्दू मीडिया की चुप्पी या गोलमोल बयान आखिर किस विचारधारा से प्रेरित है .. इन लोगोने आज तक देश के सामने जो तकरीरे दी बो सच है या जो खुली आँखों से पूरे देश को दिख रहा है बो सच है .. हिन्दुस्तान में पाकिस्तान का झंडा फहराना .. और हिन्दुस्तान की रक्षा में जान कुर्वान कर शहीद हुए देशभक्तों के स्मृति स्थल पर क्रूर हमला आकिर इस्लाम की किस इंसानी विचार धारा के तहत जायज ठहराया जा सक्ता है ………………???

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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12 thoughts on “अमर जवान ज्योति स्मारक भी तोड़ डाला मुंबई में उपद्रवियों ने…

  1. kya batau man to karta hai ki saalon ko goli maar du Aise upadraviyon ko Kyu hamara kanoon saja nahi de pata hai…kehne ko to kaanoon se uppar koi nahi hota par kanoon Chand logon ki mutthi me hi band hai

  2. Islam ya unke dharm guru kabhi bhi shanti nahi sikhlati hai, Sikhlati hai to sirf hinsa evam kisi ko bhi maar kar apna astitwa kayam karna, jiska itihaas gawaah hai ki raaj paat ke liye beta apne saare khandaan ko maar sakta hai. Shanti sirf unke jubaan par rahti hai dil me rahta hai to sirf danga jisme hamari media sahyag kar rahi hai aur sarkar to?

  3. aise logon par kari karyehwaie honi chahiye…aur desh drohi ka mukadma chalana chahiye….lkn meine jitni bar namaj parhi hai duwa jab manga jata hai….to apne desh aur rashtra ki salamti ki duwa maangi jaati hai….

  4. इन दुष्ट ,जाहिल और धर्मान्ध लोगों के लिए देशभक्ति और देश का सम्मान कोई मायने नही रखता है | इन्होने आजादी की लड़ाई में भी सिर्फ इसलिए शिरकत की थी की आजादी मिलने पर ये बंटवारा कर सके और अपने लिए एक अलग देश पर कब्जा कर सकें |

  5. —कडुवी सच को व्यया कर रही हैं ये रचना! इस इसमें लिखी हुई बाते ही सत्य हैं..इसे स्वीकार करना ही पडेगा! समय रहते हुए ऐसी घटनाओं पर काबू न पाया गया तो आने वाला कल बहुत ही भयभीत होगा!

    श्री पवन अवस्थी जी ,इस रचने के लिए आपको आभार सहित बहुत बहुत धन्यबाद..

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