Home देश दलाली, धंधागिरी, शराबखोरी और पिटाई, मतलब पत्रकारों का चुनाव

दलाली, धंधागिरी, शराबखोरी और पिटाई, मतलब पत्रकारों का चुनाव

दलाली, धंधागिरी, शराबखोरी और पिटाई, मतलब पत्रकारों का चुनाव
इतना हल्‍ला तो राष्‍ट्रपति चुनाव तक पर भी नहीं हुआ था
झक्‍कास पार्टियों में मुद्दे लापता, लगी आरोपों की मूसलाधार झड़ी

-कुमार सौवीर||
लखनऊ: कुल जमा 317 सदस्‍यों वाली एक कमेटी का चुनाव और हंगामा इतना जैसे राष्‍ट्रपति का निर्वाचन हो रहा हो। तुर्रा यह कि ज्‍यादातर प्रत्‍याशियों को यह पता ही नहीं है कि आखिर इस चुनाव के बाद उन्‍हें करना ही क्‍या है या यह कि उनका लक्ष्‍य-मकसद क्‍या होगा। लेकिन पार्टी-बंदी जोरों पर है। पार्टियां भी तेजी पर हैं। खाना-पीना तो बदस्‍तूर जारी है। खुले खर्च पर कोई भी अपना हाथ नहीं बंद कर रहा है। पूरा माहौल झक्‍कास है।
यह हालत है उप्र राज्‍य मुख्‍यालय मान्‍यताप्राप्‍त संवाददाता समिति के होने वाले चुनाव की। सारा हल्‍ला केवल एक-दूसरे पर लांछन लगाने तक ही सीमित है। कोई दलाली को लेकर उसकी कुख्‍यात करतूतों को गिन रहा है, कोई दूसरे पर चारित्रिक मामलों को उछाल रहा है। कोई कहता है कि बसपा सरकार और उसके अफसरों की दलाली में अगले का नम्‍बर अव्‍वल था तो कोई बताता है कि किस तरह पंचम तल पर उसकी दलाली चलती थी। पत्रकार बीमा में धंधेबाजी की बातें किसी की हांडी में पकायी जा रही है तो कोई पीजीआई में चिकित्‍सा सुविधा जैसे के लालीपॉपनुमा वादे को खारिज कर रहा है। सदस्‍य भी सवाल करते हैं कि आखिर किसकी साजिशों के चलते सदस्‍यों की प्रतिष्‍ठा को नेस्‍तनाबूद कर दिया गया। एक-दूसरे की पैंट खोलने में सभी जुटे हैं। पेश है, कमे‍टी की लगाम थामने की कोशिशों के लिए भिड़ रहे लोगों से बातचीत।
क्‍या आप ऐसे शख्‍स को चुनेंगें जो केवल इटावा के नाम पर धौंस चलाये और अपना धंधा चमकाता रहे। आप क्‍या ऐसे लोगों को अपना नेतृत्‍व सौंपना चाहते हैं जिनका मकसद सत्‍ता-पुलिस की दलाली ही है। क्‍या आप उनके हाथों में अपनी कमान देना चाहते हैं जिनका मकसद किसी भी कीमत पर सहारा समूह की लाइजिनिंग करना है। चाहे भी हो, बस दलाली होती रहे। अगर ऐसा है तो आप बेशक इन लोगों को चुन लें। मुझे कोई दिक्‍कत नहीं। लेकिन याद रखें कि अगर ऐसा हुआ तो पत्रकारिता को अपूरणीय क्षति जरूर होगी।
शिवशंकर गोस्‍वामी जनसंदेश टाइम्‍स में रिपोर्टर हैं। उम्र है 59 साल। श्रमजीवी पत्रकारों को बीमा सुविधा के लिए सरकार की ओर से बनी समिति के कर्ताधर्ता हैं गोस्‍वामी। मौजूदा चुनाव तैयारी पर उनका कहना है कि वे घर-घर सीधे पहुंच रहे हैं। व्‍यक्तिगत तौर पर सम्‍पर्क करने की कोशिश हो रही है। पत्रकारों को सरकारी बीमा सुविधा को लेकर चल रहे विवाद पर उन्‍होंने बताया कि कल्‍याण सिंह सरकार के वक्‍त में 25 लाख सालाना की मदद से यह सुविधा शुरू हुई थी। बाद में भारी लड़ाई भी की। पांच सौ से अधिक पत्रकार उससे लाभान्वित हो रहे हैं। एक सवाल पर उन्‍होंने कहा कि शायद 25 सदस्‍य ऐसे हैं जो मान्‍यताप्राप्‍त हैं। हालांकि सही-सही संख्‍या उन्‍हें याद नहीं है।
गोस्‍वामी के जटिल और अभद्र व्‍यवहार के बारे में उनका कहना है कि ऐसा बिलकुल नहीं  है। राज्‍य निर्वाचन आयोग के कार्यालय में मारपीट के बारे में उनका कहना है कि यह एक सामान्‍य सी झड़प थी, लेकिन लोगों ने उसे तूल दे दिया है। गोस्‍वामी का दावा है कि उनका मकसद पत्रकारों को समान सुविधा दिलाना ही है। चाहे वह चिकित्‍सा सुविधा हो या चाहे बीमा वगैरह। वे कहते हैं कि पत्रकारों की प्रतिष्‍ठा होनी ही चाहिए। हर कीमत पर। लेकिन उनका भी चेहरा बेनकाब किया जाना चाहिए जो केवल और केवल दलाली करते हैं। मेरा मकसद दलालों को छांटना और बिरादरी का सम्‍मान लौटाना ही रहेगा।
बकौल हेमंत तिवारी: होगा क्‍या। अरे वही होगा जो अब तक होता रहा है। कमेटी चुनी जाएगी।— अरे, क्‍या आपको नहीं पता है कि कमेटी क्‍या करती है। वही करती है जो करना चाहिए। वही करेगी जो करती रही थी। पत्रकारों के हितों के लेकर ही काम करेगी।— लक्ष्‍य क्‍या मतलब। अरे वही होगा जो होना चाहिए। क्‍या आपको नहीं पता है कि समिति क्‍या करती है या क्‍या करेगी।
52 साल के हेमंत तिवारी पहले भी समिति के सचिव रह चुके हैं। इस सवाल पर कि अगर पहले की कमेटी ठीक चल रही थी तो तब आपने क्‍यों विवाद खड़ा किया, हेमंत ने बताया कि वह तो चुनाव के विवाद के चलते ही गड़बड़ी हुई थी। जब पूछा गया कि दूसरों के बजाय आपको क्‍यों चुना जाए, हेमंत तिवारी ने बताया कि यह तो सदस्‍यों की इच्‍छा है, जिसे चाहें अपना वोट दें और जिसे चाहें हरा दें। हेमंत का दावा है कि कमेटी का लक्ष्‍य वही होगा, वही फैसला और कार्रवाई होगी जो कमेटी तय करेगी। सवाल तो बहुत थे, लेकिन इसके पहले कि यह पूछा जाता कि उन पर उठे विवादों पर उनका क्‍या जवाब है, हेमंत तिवारी से बातचीत खत्‍म हो गयी।
मनमोहन पिछली बार भी अध्‍यक्ष प्रत्‍याशी थे। तब मनमोहन और हेमंत ही चुनाव में हिसाम सिद्दीकी से हारे थे। इस बार भी वे चुनाव लड़ रहे हैं। दैनिक जागरण, प्रतिदिन और अब राष्‍ट्रीय सहारा में कार्यरत हैं। घर-घर सम्‍पर्क तेजी से चल रहा है। सवालों के जवाब पर मनमोहन का केवल यह कहना है कि मैं पत्रकार हूं और जेनुवन पत्रकार हूं। मेरे बारे में सभी सदस्‍यों को साफ पता है। यह चुनाव इस बारे में फैसला कर ही देगा।
चुनाव लड़ने के सवाल पर मनमोहन कहते हैं कि हमारा मकसद केवल पत्रकार और पत्रकार बिरादरी के सम्‍मान को प्रतिष्‍ठापित करना ही है। पत्रकारों का हित ही मेरा ध्‍येय है। जीतने के बाद वे हर हाल में अपने इस संकल्‍प को पूरा करेंगे। इस सवाल पर कि आखिर कोई सदस्‍य उन्‍हें क्‍यों वोट दे, मनमोहन ने कहा कि इस बात का फैसला तो मेरा अब तक का काम, संघर्ष और संकल्‍प को लेकर सदस्‍यों को मेरी छवि को ही करना होगा। कमेटी का चुनाव ही पत्रकारों की प्रतिष्‍ठा पर लिटमस पेपर साबित होगी।
प्रभात त्रिपाठी समाजवाद का उदय अखबार छापते हैं। प्रभात कुबूल करते हैं कि वे बहुत बोलते हैं। लेकिन यह भी जोड़ते हैं कि अपनी बात को वजन देने के लिए अगर ऐसा है तो इसमें गलत क्‍या है। उनका कहना है कि मेरी कमेटी में फर्जी लोगों की जगह नहीं होगी। यह नहीं होगा कि आप पंजाब केसरी से निकाले गये तो बिना अलिफ-लीम समझे, उर्दू अखबार की मान्‍यता थाम लिया। धंधा मत करो। प्रेस क्‍लब को किसी की प्रापर्टी से नहीं  बनाया जाएगा। क्‍लब पर किसी संघ की बपौती नहीं है। सभी मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकार को बिना भेदभाव के सदस्‍यता मिले। दलाल, ठेकेदारों की सफाई और अक्षमों का चिन्‍हीकरण होगा।
प्रभात त्रिपाठी वे कहते हैं कि लखनऊ से बाहर पोस्‍टेड लोगों को क्‍या मान्‍यता दी जाए, क्‍यों उन्‍हें सुविधाएं मिलें। नहीं, उनकी मान्‍यता खत्‍म हो और उनके मकान निरस्‍त कर जरूरतमंद को मिलें। यह भी  नहीं चलेगी कि आप पत्रकार-बीमा-कम्‍पनी चलाते रहें, चंद लग्‍गू-भग्‍गू लेकर। अरे हिसाब तो देना ही पडेगा। अफसरों की दलाली करनी हो तो खुल कर कीजिए ना, बताइये कि बेरोजगारी के बावजूद आप कैसे ऐयाशी वाली जिंदगी काट रहे हैं। वे नाम पूछने पर कहते हैं कि यह तीनों लोग मुख्‍यमंत्री व अफसरों की दलाली में शामिल थे।

Facebook Comments
(Visited 1 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.