लोकतान्त्रिक देश में फेसबुक पर अलोकतान्त्रिकता के प्रहरी!

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“राष्ट्रपति जी से जवाब माँगा तो उन्होंने , अपने फेस बुक पेज से मुझे block कर दिया | ये कैसा लोकतंत्र है भारत का” ? राष्ट्रपति के नाम विजय पाटनी का खुला ख़त

माननीय राष्ट्रपति जी
सादर प्रणाम

मीडिया में खबरे आ रही है की , इस पंद्रह अगस्त को आदरणीय प्रधान मंत्री जी 60 लाख गरीब परिवारों को , मुफ्त में मोबाइल और साथ में मुफ्त 200 रुपये की टॉक टाइम भी देने जा रहें है , और इस योजना में , सरकार का करीब 76 हजार करोड़ रुपये खर्चा होगा |
आदरणीय राष्ट्रपति जी , मैं एक मिडिल क्लास व्यक्ति हूँ , मुझे इस योजना का कोई लाभ नहीं  मिलेगा , लेकिन यदि मुझे ये मुफ्त मोबाइल दिया जाता तो भी मैं नहीं लेता , क्यूँ आप जानना  चाहेंगे ? तो सुनिए और गौर कीजिये ….

सर , एक और जहां भारत पर वर्ल्ड बैंक का काफी क़र्ज़ है , और दूसरी और इस  देश में गरीब परिवारों को मुलभुत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है| कितने ही गरीब लोग , बामुश्किल दो वक्त की रोटी खा पा  रहें है , देश में महंगाई इस कद्र व्याप्त है की BPL परिवार क्या , मिडिल क्लास परिवार भी , पोष्टिक भोजन नहीं कर पा रहा है , दूध , शक्कर , सब्जियां , दालें सब की कीमतें आसमान छू रही है , लेकिन सरकार, सरकारी खजाने में कमी का हवाला देकर , आये दिन पेट्रोल , डीजल के दाम बढ़ा रही है ,,  गेस पर सब्सिडी ख़त्म करने की बात कह रही है , ऐसे में फिर 76 हजार करोड़ की फिजूल खर्ची क्यूँ ?

सर मुझे सरकार की balance sheet का पता नहीं है , हो सकता है सरकार के पास 76 हजार करोड़ रूपये excess  पड़ें हो , पर इस का उपयोग और भी जनहित के कार्यों के लिए हो सकता है , सर मैं tex payee हूँ , मैं भी सरकार को किसी ना किसी तरह पैंसा देता हूँ , और मैं चाहता हूँ सरकार मुझ से लिया पैसा , देश की प्रगति पर खर्च करें , गरीबों के उत्थान के लिए खर्च करें , किसानों की भलाई के लिए खर्च करें , बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए खर्च करें  , ना की ऐसे फिजूल के खर्चों में , मेरा खून पसीने से कमाया पैसा लगाया जाए |

१. सर , देश में बिजली की कमी है , पूरा देश बिजली संकट से लड़ रहा है , गाँवों की बात छोडियें, शहरों में भी 24 घंटे बिजली नहीं आ पाती , क्यूंकि देश में बिजली का उत्पादन कम है , इस  76 हजार करोड़ रुपये  से देश में 5 पॉवर प्लांट लग सकतें है , जिनमे करीब 20000 मेगवाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है , क्या इस पैसे का उपयोग सरकार ऐसे नहीं कर सकती ?

२. सर , देश में लाखों गरीब परिवार 20 रुपये रोज में अपना जीवन यापन कर रहें है , क्या सरकार उन परिवारों को मुफ्त में गेहूं चावल वितरित नहीं कर सकती ? अव्वल देश में वैसे भी लाखों टन अनाज सड़ता है , सरकार मोबाइल को छोड़ गेहूं वितरण करें , तो हम भी इस नेक काम में सरकार के भागीदार बनना चाहेंगे |

३. सर देश में जल संकट है , सुप्रीम कौर्ट ने नदियों को जोड़ने की योजना पर काम करने को सरकार को कहा है , सरकार चाहें तो ये पैसा उस काम में लगा सकती है , हमें ख़ुशी होगी |

४. सर , पूर्व आर्मी जनरल जनरल वीके सिंह साहब बता गये थे की सेना के पास आधुनिक शस्त्रों की कमी है , सरकार चाहें तो ये पैसा सेना को दे दे , हमे ऐतराज नहीं है |

सर , मैं बहुत दुखी और भयभीत हूँ , क्यूंकि  इस फिजूल खर्ची का बोझ कैसे ना कैसे भविष्य में मुझ पर ही पड़ेगा , और मैं इस के लिए कतई तैयार नहीं हूँ , यदि सरकार ये कदम उठाती है , तो आज के बाद में कभी income tex नहीं भरूँगा , और मैं देश के मिडिल क्लास भी आह्वान करूँगा , की वो भी सरकार को किसी भी तरह का tex pay ना करें,  क्यूंकि हम हमारें पैसों को यूँ लुटता नहीं देख सकतें |

आप देश के प्रथम नागरिक है,  मुझे उम्मीद है आप आम आदमी की , आम समस्या पर गौर करेंगें , और सरकार के इस लोक लुभावन फेसलें पर समय रहतें रोक लगायेंगे … |
धन्यवाद |
आम भारतीय
विजय पाटनी
नसीराबाद राजस्थान
इस ख़त को president साहब के फेसबुक पेज पर कल रात्रि मैंने पोस्ट किया था , उसका नतीजा ये निकला कि आज मुझे उस पेज से block कर दिया गया, सच की आवाज उठाओगे तो लोग कान बंद कर ही लेंगे, पर हम अपनी आवाज और बुलंद करेंगे  जय हिंद 🙂

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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12 thoughts on “लोकतान्त्रिक देश में फेसबुक पर अलोकतान्त्रिकता के प्रहरी!

  1. प्रिय पाटनी जी, आपने सही समय पर सही कदम उठाया है। महामहिम राष्ट्रपति को ही पत्र लिखा जाना चाहिए था। वे कैसे भी हों ,हैं तो हमारे राष्ट्रपति ही। सरकार को मुफ्त मोबाइल देने का कोई अधिकार नहीं है। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी सरकारी व्यवस्था ने एक और भ्रष्टाचार का रास्ता खोल दिया है। मुझे तो लगता है कि इस तरह के मोबाइल सही व्यक्तियों तक पहुँच ही नहीं पायेंगे। साकार ने पहले ‘ आकाश’ कंप्यूटर स्लेट सस्ते दर पर देने कि घोषणा की थी पर वे अभी तक छात्रों तक नहीं पहुँच सके है। इस योजना का भी यही हश्र होनेवाला है।

  2. पहली बात ये देश के राष्ट्रपति नहीं हैं ये सोनिया के राष्ट्रपति हैं ….फैसले दस जनपथ से होते हैं इनका काम सिर्फ मोहर लगाना …..अगर इस देश के लोगों मे जरा सी भी राष्ट्र भक्ति बची होगी तो इनको कोई वोट नहीं देगा …..अब मुझे इनसे ज्यादा अपने आप पर शर्म आती है …आखिर इस देश के लोगों की कौन सी मज़बूरी है जो इन भ्रष्ट लोगों को हर बार सत्ता सौंप दी जाती है ……हमारी बिल्ली हमी से म्याऊं ….

  3. विजय जी आप ने जो लिखा वही सोच मेरी है! लेकिन हम क्या कर सकते है!
    इन कांग्रेसी नेताओ के पास यही एक वोट लेने का तरीका है और दूसरा अपना घर भरने का!जिन बेचारों बी पी एल परिवारों.को अपना पेट भरने के लिए रोटी के लाले पड़े हो उनको यह लोग खाना नहीं दे सकते क्योंकि यह लोग उनको गरीब ही रखना चाहती है नरेगा जैसी सकीमे चलाकर इनको निक्मा कर दिया है और अब मुखत में मोबाइल फौन और साथ में २०० रूपये का फ्री टाक टाइम दे कर अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है! देश बर्बाद भले ही हो जाए लेकिन इन गरीब लोगो के वोट कांग्रेस को ही मिलने चाहिए!
    इससे कांग्रेसी नेताओ को डबल फायदा होगा exampal 1000 /- रूपये का मोबाइल 2000 /- रूपये में खरीदा जाएगा! एक तो इनका बैंक बैलेंस बढेगा दूसरा वोट बैंक बढेगा!

  4. पाटनी जी आपने पत्र के अंतिम वाक्यों में जो अपनी राय दी है उससे मैं १००% राजी हूँ.अब देश की बाकी जनता इस बारे मैं क्या इत्तफाक रखती है.

  5. श्रीमानजी यह वोटों की राजनीति है,आप टेक्स देते है अच्छी बात है,पर उसे खर्च करना सर्कार जिसे आपने खर्च करने के लिए चुना है का हक़ है.नरेगा का अंजाम आपने देखा ही है बिना काम हुए, अथवा स्तरहीन काम के बदले मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, और सर्कार अपनी पीठ थपथपा रही है .आज गावों से शहर मे काम करने के लिए श्रमिक आने को राजी नहीं क्योंकि वहां उन्हें जब बिना काम किये १३५ रुपये मिल रहें हों तो दो दिन का काम चल जाता है, और जब पूरा परिवार नरेगा पर हो तो बात ही क्या?देख कर आज यह निष्कर्ष निकल रहा है की सरकार सब को निखट्टू बना रही है.
    यही हल बी पी एल का है कितने ही इस कार्ड के धारक ऐसे हैं जिनके पास सब सुविधाए है,मेरे जानकार परिवार हैं जिनकी गाँव में तीन तीन दुकाने हैं और वे इसका लाभ उठा रहें हैं .ऐसे भी २५% बी पी एल लोग मिल जायेंगे जो मोबाइल धारक हैं,हो तो इस से ज्यादा ,सुबह सुबह मैं सैर को ५ बजे जाता हूँ ,तो कचरा बीनने वालों को मोबाइल की टोर्च से कचरे में काम की चीजें तलाशते,तथा गाना सुनते पाता हूँ.मुझे जलन नहीं ख़ुशी होती है की देश में तरक्की हुई है.मन की सब लोग ऐसे नहीं हैं.
    सरकार जनता के पैसे इस तरह लुटा कर उनके रोजगार का जुगाड़ भी कर सकती है,ऐसी योजनायें बना सकती है, लेकिन नहीं ,वोह इन्हें गरीब ही रखना चाहती है ताकि वे इस नाम पर उसे फिर चुनते रहें. बाकि इस बात से सरकार के निति निर्माताओं के मानसिक diwaliyepan का अंदाज तो लग ही सकता है.

  6. सर,(पाटनी साहेब)
    मै आपके वक्तव्य से सहमत हूँ लेकिन जो पत्र अपने रास्त्रपति जी के नाम लिखा है वह बेमानी है क्योंकि वे भी तो एक समय मै राजनेतिक पार्टी के सदस्य रह चुके है और अछि तरह जानते है की जितनी भी युजनाये बनती है सब यही सोचकर बनती हैं की किस प्रकार देश के पैसे को नेताओं के तिजोरी तक पहुचाया जा सके.इसके अलवा क्या वे यह नहीं जानते की फ़ूड कोर्पोरतिओं ऑफ़ त्न्डिया के गोदामों में गेहूं सारा रहा है उसको गरीबो में बाँट कर देश को कुछ हद तक सहारा मिल सकते.कुल मिला कर जो लोग अपने अप को बूढी जीवी कहते हैं. वाही लोग असी प्लानिंग करते हैं.दर्जनों योजने ब्प्ल परिवार के कल्याण के लिए बनी जिनका लाभ उनको मिल रहा है जिनको पता ही नहीं की ब्प्ल होता क्या है. किशोरे कुमार सक्सेना.

  7. प्रणव मुखर्जी को विदेशों में जमा काला धन और उसके जमाकर्ताओं के बारे में पूरी जानकारी है, लेकिन वे देश को गुमराह कर रहे हैं। आईज तक उन्होंने कोई ऐसा कदम नहीं उटाया वित्त मंत्री रहते जिससे इस पर रोक लग सके।.

  8. AAJ KE HALAT ME MEDIA KO SARKAR KE HAR MANTRI, NETA YA VIPAKSH SE SAWAL KARNA CHAHIYE KI DESH KI SURAKSHA KANOON KE TAHAT KYA YAHA KE MOOL NAGRIK SURAKSHIT HAI? AGAR HAI TO PHIR JAMMU AUR ASSAM ME KHADEDA KYO JA RAHA HAI…. WO WAHA JANE KE LIYE BHI TAIYAR NAHI HAI AISA KYO?

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