मीडिया दरबार की खबर का असर: करनाल अपना घर पर छापा, संचालिका फरार..

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न्यूज़ इम्पेक्ट
अपना घर मामला : सवालों से घिरा प्रशासन
अपना घर संचालिका के खिलाफ मामला दर्ज
11 लड़कियों का करवाया मेडिकल

करनाल,(अनिल लाम्बा) : करनाल के अपना घर में रहने वाली युवतियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट के मामले ने मीडिया दरबार पर “अंकल वापस मत भेजना चाहे मार दो” शीर्षक से प्रकाशित होते ही तूल पकड़  लिया है. इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिशों में जुटा प्रशासन मीडिया दरबार पर यह मामला उठने पर अब हरकत में आया है. जिला पुलिस ने कार्यक्रम अधिकारी क़ी शिकायत पर अपना घर संचालिका मोनिका के खिलाफ बच्चों से मारपीट करने, दुर्व्यवहार करने व जबरन काम करवाने के आरोप में मामला दर्ज किया है. संचालिका अभी फरार है.

आज अपना घर से शिफ्ट की गई सभी युवतियों का सिविल अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया। बताया जाता है कि दो युवतियों के शरीर पर चोट के निशान मिलने से उनकी एमएलआर काटी गई है। इस बीच पीएमओ अमर बजाज का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं किये जाने के निर्देश दिये गए हैं. युवतियों का मेडिकल करने के लिए चार डाक्टरों का एक पैनल बनाया गया है. माना जा रहा है कि मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन अपना घर की संचालिका और आरोपों से घिरे सह संचालक के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है। हालांकि इस मामले के उजागर होने के बाद अभी तक प्रशासन किसी की भी जिम्मेदारी तय करने मे नाकाम रहा है.

चौंकाने वाला पहलू तो ये उजागर हुआ है कि डीएसपी को इस मामले की जानकारी तक नहीं है और कोई शिकायत अभी तक उनके पास नहीं पहुंची है. बता दें कि अपना घर में रहने वाली तीन लड़कियों ने एक साल पहले सह संचालक पर यौन शौषण और मारपीट के आरोप लगाएं थे. इन आरोपों के सामने आने के बाद तीनों लड़कियों को श्रद्धानंद अनाथालय में शिफ्ट कर दिया था लेकिन अब जब ये मामला सुर्खियों में आया तो प्रशासन ने हड़बड़ी दिखाते हुए अपना घर को न सिर्फ अस्थायी तौर पर बंद करा दिया बल्कि उसमे रह रही 11 लड़कियों को दूसरे अनाथालयों में शिफ्ट कर दिया. डीसी रेणु एस फूलिया ने लड़कियों को शिफ्ट करने का तर्क दिया कि अपना घर में पर्याप्त जगह नहीं थी और न ही अपना घर का रजिस्ट्रेशन भी नहीं था लेकिन इस सवाल का अभी तक कोई जवाब प्रशासन नहीं दे पाया है कि जब अपना घर बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई. अब प्रशासन संचालिका के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच में जुट गया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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