Home खेल नयी राजनैतिक पार्टी जिताएगी कांग्रेस को अगला लोकसभा चुनाव..

नयी राजनैतिक पार्टी जिताएगी कांग्रेस को अगला लोकसभा चुनाव..

-मॉडरेटर||

आखिर अर्थी उठ ही गयी उन भारतीयों की आशाओं की, जो अन्ना हजारे द्वारा चलाये गए आन्दोलन को देख यकायक उम्मीदों का एक दीपक जला बैठे थे. जंतर मन्तर पर जब लोगों ने देखा कि एक पिचहत्तर साल का वृद्ध देश की सबसे बड़ी भ्रष्टाचार रुपी समस्या से लड़ने के लिए अनशन पर बैठ रहा है तो उसे लगा कि अब इस देश में भ्रष्टाचार नहीं रहेगा. इससे पहले कुछ राजनेताओं, एनजीओ और मीडिया के अलावा देश में महाराष्ट्र के अलावा अन्य किसी भी राज्य में किसी को भी पता नहीं था कि अन्ना हजारे किस मर्ज की दवा है मगर जब मीडिया ने बताया कि महाराष्ट्र में अन्ना हजारे ने कई भ्रष्ट मंत्रियों से अपने आंदोलनों के जरिये मंत्रिपद छिनवा दिया था और शरद पंवार जैसे छंटे हुए और लोमड़ी से भी ज्यादा चालाक राजनेता को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहते चैन से राज नहीं करने दिया तो हर कदम पर भ्रष्टाचार से सताया आम आदमी सपने देखने लगा कि जल्द ही भारत भ्रष्टाचार रुपी दानव से मुक्त हो जायेगा.

उसकी इस उम्मीद को पक्का करने पर ठप्पा लगाया लोकपाल बिल पर बनी संसदीय समिति के मुखिया पद से इस्तीफ़ा देकर खुद शरद पंवार ने. शरद पंवार के इस्तीफे ने आम आदमी को पूरा विश्वास दिला दिया कि आईएसी नामक यह आन्दोलन सफल होने में सिर्फ उसके सहयोग की जरूरत है, सो हर आम आदमी इस आन्दोलन से दिल से जुड गया.

यदि कोई उसे सत्य बताने का प्रयत्न करता तो आम आदमी गुस्से से उबल पड़ता और सच को कांग्रेस का दलाल समझ हड़काने लगता. आम आदमी को क्या पता था कि यह एक सोची समझी चाल थी, जिसका हर दांव अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसौदिया चल रहे थे. आखिर उन्हें उनके एनजीओ को विदेशों से मिलने वाले लाखों डॉलर्स के चंदे का परिणाम भी दिखाना था अपने विदेशी आकाओं को. सिर्फ विदेशी ही नहीं हिसार के एक अरबपति उद्योगपति सांसद ने भी अपनी तिजोरी खोल रखी थी इस आन्दोलन के लिए.

कांग्रेस और उसके भ्रष्ट शासन को पटखनी देने की इस झूठी महाभारत को परवान चढाने का काम भी अंदरखाने कांग्रेस ही कर रही थी. इसी का नतीजा था अन्ना हजारे को बिना किसी अपराध के तिहाड़ की सैर करवाना. ताकि अन्ना के साथ ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें. यही नहीं तिहाड़ जेल में किरण बेदी अन्ना हजारे का अवैध रूप से एक बार नहीं दो बार विडियो इंटरव्यू रिकॉर्ड कर लेती हैं और यह सभी टीवी चैनल्स पर प्रसारित भी हो जाता है और इस मामले में कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं होती. आखिर क्यों? क्या कोई आम आदमी या अधिकारी अथवा पत्रकार बिना अनुमति तिहाड़ जेल में जाकर किसी बंदी का इंटरव्यू रिकॉर्ड कर सकता है? कत्तई नहीं. यह एक गंभीर अपराध है. मगर इस अपराध को आज तक किसी ने नोटिस में ही नहीं लिया. क्यों, क्यों और क्यों? क्योंकि आम आदमी को फंसाना जो था. तरह तरह के ड्रामें रचे गए और सताया हुआ आम आदमी इस चक्रव्यूह में फंसता गया.

अब नयी नौटंकी के ज़रिये एक और राजनैतिक पार्टी का जन्म हो रहा है, जो दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनावों में पांच सौ तियालिस या कुछ कम सीटों पर खम्म ठोकेगी.

यहाँ देखने वाली बात यह है कि आम मतदाता का एक अच्छा खासा प्रतिशत इस भ्रष्ट और निक्कमी सरकार से बुरी तरह उकताया हुआ है और आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को छठी का दूध याद दिलाने को तैयार बैठा है. ध्यान रहे कि हर पार्टी का अपना एक वोट बैंक होता है जो हर हांल में अपनी पार्टी को ही वोट देता है पर वह निर्णायक नहीं होता. निर्णायक वोट हमेशा हवा की झोंक में जाता है. अब यह वोट आगामी चुनावों में कितनी पार्टियों में बटें जिससे कांग्रेस का परम्परागत वोट कांग्रेस को सत्ता में या सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीता कर ला सके सारा खेल यही है. इस ड्रामें की पटकथा बहुत ही सोच समझ कर लिखी गयी है और पर्दा उठने से गिरने की टाइमिंग का पूरा ध्यान रखा गया है.

यहाँ यह भी देखना होगा कि कांग्रेस ने महानरेगा जैसी कामधेनु के जरिये हर गांव में अपने कार्यकर्ताओं को दूध दिया है. सो उसके परम्परागत वोटों में यदि कोई इजाफा नहीं होता तो कमी भी नहीं आएगी. बाकि काम केजरीवाल और सिसौदिया युगल के हवाले है ही. राहुल गाँधी के प्रधान मंत्री बनने के सफर की ही एक कथा है यह.

Facebook Comments
(Visited 1 times, 1 visits today)

Leave your comment to Cancel Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.