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अंकल वापिस मत भेजना चाहे मार दो…

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रोहतक अपना घर मामले के बाद भी नहीं लिया सबक करनाल प्रशासन ने
अनाथ बच्चियों को दी शारीरिक यातनाएं अपना घर में
अंकल वापिस मत भेजना चाहे मार दो
बच्चियां बोली : डंडे से पीटती थी संचालिका

करनाल, (इंडिया विजन) : रोहतक के अपना घर में बच्चियों से यौन शोषण का मामला उजागर होने के

अपना घर से निकाली गई 5 बच्चियां अपनी व्यथा सुनाने के बाद लौटती हुई।

बाद करनाल भी अपना घर की बच्चियों से एक साल पहले हुए यौन शोषण तथा 5 बच्चियों को अपना घर में डंडे से शारीरिक यातनाएं देने के मामले में सुर्खियां बटोरने लगा है, लेकिन हद तो इस बात की है कि इतना बड़ा मामला सामने आ जाने के बाद भी अभी तक न तो किसी के खिलाफ अपराधिक मुकद्दमा दर्ज किया गया है और न ही इस मामले में अभी तक कोई जांच बिठाई गई है। लगता है कि प्रशासन इस मामले की पूरी तरह से लीपापोती करने में जुटा है। हैरानी का दूसरा पहलू यह है कि जब करनाल के अपना घर के पास अनाथ बच्चों को पालने और पोसने की कोई मंजूरी नही थी तो प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके खिलाफ कदम क्यों नही उठाया। जबकि पूर्व में बाल संरक्षण अधिकार आयोग हरियाणा सरकार को कम से कम 11 बार पत्र लिखकर कह चुका है कि हरियाणा में बच्चों का भरन-पोषण करने वाली जितनी भी संस्थाएं चल रही है उनकी माकूल जांच करवाई जाए। करनाल के अपना घर से निकाली गई 5 बच्चियों ने मीडिया के समक्ष इस बात को स्वीकार किया है कि उन्हें न केवल शारीरिक यातनाएं दी जाती थी। बल्कि संचालिका उन्हें डंडे से पीटती थी। अब तक बच्चियों के शरीर पर नील के निशान साफ नजर आ रहे थे। बच्चियों ने बताया है कि उनकी निर्मम तरीके से न केवल पिटाई की जाती थी। बल्कि अपना घर का सारा कार्य भी उनसे करवाया जाता था। यहां तक कि उनसे झाडू और पोंछे लगवाए जाते थे। आखिर इन बच्चियों पर जुल्म क्यों ढाया गया। इसकी आवश्यक जांच करने की जरूरत है। अनाथ बच्चियों ने यह भी बताया कि एक बच्ची को पागल करार दिया जाता था, लेकिन वह पागल नही थी।  सभी बच्चों को खाना खुद बनाना पड़ता था। बच्चियों ने यह भी खुलासा किया कि एक बच्चे को काफी मारा गया था जिससे उसका पैर खराब हो गया। अपना घर में हुई निर्मम पिटाई से बच्चियां इतनी सहम गई है कि जब इनसे पूछा गया कि क्या वह दोबारा अपना घर में जाना चाहेंगीं तो बच्चियांं बोली वहां मत भेजना अंकल चाहे हमें यहां मार दो। बच्चियों की यह दयनीय हालत साफ बयां कर रही है कि अनाथ बच्चियों को पालने वाली यह संस्था न केवल सरकार की बल्कि प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर बच्चियों को शारीरिक यातनांए देकर केवल अपना हित साध रही थी। काबिलेगौर बात यह है कि कल भी 3 सग्गी बहनों ने आरोप लगाया था कि एक साल पहले उनका यौन शोषण भी किया गया था। अभी तक इस मामले में प्रशासन ने कोई कदम नही उठाया, लेकिन दूसरे ही दिन 5 बच्चियों ने शारीरिक यातनाएं देने का सच उगल कर सनसनी फैला दी है। इन बच्चियों की उम्र 10 से 14 वर्ष तक की है। बच्चियां काफी सहमी हुई है। बच्चियों की माने तो उन्हें पेट भर भोजन भी नही मिलता था और उन्हें सिकुड़ कर सोना पड़ता था। न ही उन्हें खेलने दिया जाता था और न ही उन्हें बाहर जाने दिया जाता था।

आप को पता है तो आप छाप दो : डी.सी.

डी.सी. रेणू.एस. फुलिया

करनाल : जिला प्रशासन ने यौन शोषण का मामला उजागर हो जाने के बाद भले ही किसी के खिलाफ कोई एक्शन न लिया हो, लेकिन इस बीच इस मामले को लेकर जब डी.सी. रेणू.एस. फुलिया से इंडिया विजन ने बात क़ी क़ि आपके मामला संज्ञान में आने के बाद आपने क्या कार्यवाही क़ी | ड़ी. सी. ने उलटा प्रश्न किया क़ि इसमें अपराध कौनसा हुआ जब उन्हें बताया गया क़ि पांच बच्चियों ने गंभीर आरोप लगाये हैं अपना घर क़ि संचालिका पर तो ड़ी. सी. ने बताया क़ि आपको पता है तो आप छाप दो |

आखिर क्यों नही कर रहा प्रशासन कार्रवाई
करनाल : हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की इजाजत लिए बिना  करनाल में अनाथ बच्चों की परवरिश होती रही और प्रशासन को भनक तक नही लगी। ऊपर से प्रशासन का कहना था कि इन्हें नोटिस भेजा गया था। क्योंकि ऊपर  मोबाईल का टावर लगा था। इसका मतलब यह है कि प्रशासन को पता था कि अनाथ बच्चों को तो पाला जा रहा है, लेकिन संचालकों के पास लाईसैंस नही है, लेकिन फिर भी कार्रवाई न होना हैरान कर रहा है। बच्चियों द्वारा यौन शोषण का आरोप लगाए जाने तथा शारीरिक प्रताडऩा का मामला सामने आ जाने के बाद भी आखिर प्रशासन क्यों कार्रवाई नही कर रहा। यह समझ से परे की बात है।

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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