SC के एक फैसले ने महिलाओं के दो तबकों को दी शानदार मजबूती…

SC के एक फैसले ने महिलाओं के दो तबकों को दी शानदार मजबूती…

-सुनील कुमार।। किसी भी विकसित लोकतंत्र में सुप्रीम कोर्ट को आम लोग एक अदालत मान लेते हैं। दरअसल यह बहुत से जजों की अलग-अलग, और मिलीजुली कई किस्म की अदालतें का एक समूह होता है जिसका फैसला वैसा ही हो सकता है जैसा कि उसे लिखने वाले जज हों। किसी एक वक्त में एक मामला एक जज से एक किस्म का फैसला पा सकता है, और अगर वह किसी दूसरे जज के सामने पड़ा होता, तो हो सकता है कि फैसला उसका ठीक उल्टा भी होता। और हर मामले में ऐसी पुनर्विचार याचिका की गुंजाइश नहीं होती कि एक जज...

सोशल मीडिया की वजह से पुरानी बातें हमेशा गूंजते रहने का खतरा..

सोशल मीडिया की वजह से पुरानी बातें हमेशा गूंजते रहने का खतरा..

-सुनील कुमार।। पिछले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्मदिन अभी गुजरा, तो बिना हो-हल्ले के चले गया। उनके प्रशंसकों में से कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी कही यह बात याद दिलाई कि उन्हें उम्मीद है कि इतिहास उनके साथ अधिक रहमदिल रहेगा। यह बात मनमोहन सिंह ने अपने कटु आलोचकों की बातों के जवाब में कही थीं। ऐसे आलोचकों का अधिकांश हिस्सा इस बात के लिए उनका सबसे बड़ा आलोचक रहता था कि वे कम बोलते थे, धीमा बोलते थे, साधारण जुबान बोलते थे, दावे नहीं करते थे, और सपने तो बिल्कुल ही नहीं दिखाते थे। इन बातों की...

भगत सिंह से देवरस को ‘बचाने’ के लिए हेडगेवार ने हफ़्ते भर समझाया था..

भगत सिंह से देवरस को ‘बचाने’ के लिए हेडगेवार ने हफ़्ते भर समझाया था..

-शम्सुल इस्लाम।। आजकल RSS और उससे जुड़े संगठन भगत सिंह और तमाम दूसरे क्रांतिकारियों का नाम बड़े ज़ोर-शोर से लेते है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि आज़ादी की यह क्रांतिकारी धारा जिस भारत का सपना देखती थी, RSS उससे बिलकुल उलट देखता है. भगत सिंह मज़दूरों का समाजवादी राज स्थापित करना चाहते थे और पक्के नास्तिक थे. RSS के संस्थापक डॉ. हेडगवार ने उस समय स्वयंसवेकों को भगत सिंह के प्रभाव से बचाने के लिए काफ़ी प्रयास किया. यही नहीं, आगे चल कर दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर ने भी भगत सिंह के आंदोलन की निंदा की. पढ़िये यह महत्वपूर्ण लेख―..“जब भगत...

चुनावी लाभ के फैसले ही तो रेवड़ी है..

चुनावी लाभ के फैसले ही तो रेवड़ी है..

केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में कुछ अहम फैसले लिए गए हैं, जिनका संबंध सत्तारुढ़ दल को चुनावी लाभ पहुंचाने से हो सकता है। इसके साथ ही निजीकरण की प्रक्रिया को तेज कर उद्योगपतियों को मुनाफा पहुंचाने का इरादा भी इन फैसलों में दिखता है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को 30 सितंबर के बाद भी लागू रखने का फैसला लिया है। पाठकों को याद होगा कि 2 साल पहले कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में यह योजना पेश की गई थी ताकि रोजगार से वंचित लोगों को भुखमरी का शिकार होने से बचाया जा सके।...

अतिवाद अतिवाद और भारत

अतिवाद अतिवाद और भारत

सर्वमित्रा सुरजन हमारे संविधान को रचा ही इस तरह से गया है कि यहां सभी श्रेणियों के लोगों को बराबरी और सम्मान से जीने का हक मिले और अनेकता में एकता की हमारी खास पहचान अक्षुण्ण रहे। लेकिन इस अनेकता के भाव को मिटाते हुए हर बात में एक को ही सर्वोपरि करने की जो नयी परिपाटी चलाई गई है, उससे अतिवाद को पनपने का मौका मिल रहा है। एक की अति का जवाब दूसरे की अति नहीं हो सकती। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने पिछले सप्ताह पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई पर बड़ी कार्रवाई की थी। जिसके तहत...

अंतिम संस्कार पर सरकारी खर्च की विरोधी जनता ही जागरूक..

अंतिम संस्कार पर सरकारी खर्च की विरोधी जनता ही जागरूक..

जापान में जहां वहां की जनता जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के अन्तिम संस्कार पर किए जा रहे सरकारी सौ करोड़ के बड़े खर्च को फिजूल खर्ची मान कर उसका देश भर में भारी विरोध कर रही है और एक हम हैं कि हमारे प्रधानमंत्री द्वारा खुद पर किए जाने वाले सालाना हजारों करोड़ के ऐतिहासिक फ़िज़ूल खर्च को होते देख कर भी चुपचाप देखते रहते हैं और चूँ भी नहीं बोलते.. हमें जापान की जनता से यह भी सीखने की महत्ती आवश्यकता है.. -सुनील कुमार।। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया...

इंदिरा गांधी होती तो किसकी मजाल थी.?

इंदिरा गांधी होती तो किसकी मजाल थी.?

कृष्ण कल्पित।। हमारी बात का उस मिस पे कुछ का़बू नहीं चलताजहां बंदूक चलती है वहां जादू नहीं चलता ! अकबर इलाहाबादी कहते हैं कि जादू की भी एक सीमा होती है और अंतत: जादू झूठ पर आधारित होता है । जादू नज़रों का धोखा/फ़रेब होता है । मज़बूरी का नाम महात्मा गांधी तो सुना था लेकिन कांग्रेस आलाकमान इतना मज़बूर पहले कब था ? यह कांग्रेस आलाकमान की मज़बूरी ही है कि उसे अशोक गहलोत को क्लीन चिट देनी पड़ी है । इंदिरा गांधी होती तो अब तक सबकी बोलती बंद हो चुकी होती । जैसे कांग्रेस आलाकमान मज़बूर...

अब जादूगर ख़ुद एक साधारण दर्शक है !

अब जादूगर ख़ुद एक साधारण दर्शक है !

कृष्ण कल्पित।। मूर्ख सलाहकारों, महत्वाकांक्षी मंत्रियों और चाटुकार अफ़सरों के कारण जादूगर ने अपनी वह जादुई ‘सोनिया-छड़ी’ गंवा दी, जिससे वह जादू दिखाया करता था । इस आत्मघाती कृत्य को जापानी भाषा में हाराकिरी कहा जाता है । मैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का सलाहकार नहीं ! फिर भी मैं सलाह दे रहा हूं कि अशोक गहलोत को यदि अपनी (बचीखुची) साख बचानी है तो उन्हें तुरंत प्रभाव से शांति धारीवाल, महेश जोशी और प्रताप सिंह खाचरियावास को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए । एक कोई सुभाष गर्ग भी बताया जाता है, और भी कई हैं । उन्हें अपने सारे लालची,...

अंकिता भंडारी हत्याकांड से उपजा आक्रोश..

अंकिता भंडारी हत्याकांड से उपजा आक्रोश..

शकील अख्तर।। उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड पर आम लोगों, खासकर युवतियों का गुस्सा उसी तरह अब सरकार और प्रशासन के खिलाफ फूट रहा है, जैसा निर्भया कांड के वक्त देखा गया था। उस समय दिल्ली और केंद्र दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी और उसके खिलाफ माहौल बनाने की शुरुआत भाजपा समेत तमाम कांग्रेस विरोधियों ने कर ही दी थी। निर्भया कांड से इस विरोध को तेज करने का एक और मौका मिला और उसके बाद जनाक्रोश को कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए इस्तेमाल किया गया। हालांकि निर्भया मामले में कांग्रेस ने कार्रवाई करने में कोई...

अब घर बैठे सुप्रीम कोर्ट की बहस सुनना, न्याय होते देखना मुमकिन..

अब घर बैठे सुप्रीम कोर्ट की बहस सुनना, न्याय होते देखना मुमकिन..

-सुनील कुमार।। सुप्रीम कोर्ट में आज एक नया इतिहास गढ़ा जा रहा है जब संवैधानिक मामलों की सुनवाई का जीवंत प्रसारण होगा। इनके ऑडियो-वीडियो की लाईव स्ट्रीमिंग इंटरनेट पर की जाएगी, और जिन्हें दिलचस्पी हो वे उन्हें देख-सुन सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसकी बुनियाद 2018 में कानून के एक छात्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला था, और उसमें संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के मामलों की अदालती कार्रवाई की लाईव स्ट्रीमिंग की इजाजत दी गई थी, और कहा गया था कि यह खुलापन सूरज की रौशनी की तरह है...

क्या ऐसे होगी पर्यावरण की रक्षा.?

क्या ऐसे होगी पर्यावरण की रक्षा.?

17 सितंबर को मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में अफ्रीका से लाए चीतों को छोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि आज भारत की धरती पर चीता लौट आए हैं और इन चीतों के साथ ही भारत की प्रकृतिप्रेमी चेतना भी पूरी शक्ति से जागृत हो उठी है। उन्होंने कहा था कि जब प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण होता है तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित होता है। लेकिन क्या यह प्रकृति प्रेमी चेतना असम तक नहीं पहुंच पाई है या फिर विशिष्ट लोगों के लिए नियमों को ताक पर रख कर भी महज प्रवचनों से प्रकृति और पर्यावरण की...

कांग्रेस के इस घर को आग लग गई घर के चिराग से…

कांग्रेस के इस घर को आग लग गई घर के चिराग से…

-सुनील कुमार।। ठीक उस वक्त जब सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की पदयात्रा की दिल को छू लेने वाली तस्वीरें हर कुछ घंटों में सामने आ रही थीं, और भारत जोड़ो यात्रा से राहुल विरोधियों में एक बेचैनी फैल रही थी, कांग्रेस पार्टी के भीतर से भी पार्टी की इस मुहिम को आग लग गई। अभी कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा भी नहीं गया है, और राजस्थान में नए मुख्यमंत्री बनाने के लिए सोनिया गांधी की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षक पहुंचे, और वहां कांग्रेस विधायकों में बगावत हो गई। शायद कांग्रेस के इतिहास में ऐसा पहली बार...