बहनजी की राजनैतिक पहेली..

बहनजी की राजनैतिक पहेली..

  ‘हर पोलिंग बूथ को जिताना है, बीएसपी को सत्ता में लाना है।’ इस नए नारे के साथ बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तरप्रदेश चुनावों में बसपा की सरकार बनने का दावा किया है। उप्र चुनावों में भाजपा, सपा, कांग्रेस यहां तक कि एआईएमआईएम भी एक अऱसे से गठजोड़ बनाने, नेताओं को तोड़ने और चुनावी वादे करने में लगी हुई हैं। चुनावों की घोषणा होने के पहले से इन सभी पार्टियों के दिग्गज नेता मैदान में हरकत करते नजर आने लगे, लेकिन बहनजी की खामोशी और लंबे वक्त तक अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गयी। बसपा की ओर से सतीश चंद्र...

क्या सचमुच लोगों को इतनी रफ़्तार से एक-एक सामान की खरीदी की जरूरत है ?

क्या सचमुच लोगों को इतनी रफ़्तार से एक-एक सामान की खरीदी की जरूरत है ?

-सुनील कुमार॥ हिंदुस्तान जैसे देश में एक वक्त घर पर माँ, या नानी-दादी साल भर के मसाले, और साल भर के लिए चार की तैयारी एक साथ कर लेती थीं। लेकिन अब बाजार में अचार मिलने लगा है तो घरों में बनना कम भी हो गया है। शहरी जिंदगी में न तो घरों में अचार-पापड़ बनाने के लिए अधिक जगह रहती, और न ही कामकाजी महिला वाले घर में इसके लिए वक्त रहता। इसलिए बाजार ने पापड़, बड़ी, अचार जैसे परंपरागत घरेलू सामानों को अब छोटे या बड़े कारखानों में बनाना शुरू कर दिया है। ठीक इसी तरह अब साल...

जिंदगी कोई दीवारघड़ी नहीं कि जिसके काँटों की घरवापसी हो..

जिंदगी कोई दीवारघड़ी नहीं कि जिसके काँटों की घरवापसी हो..

-सुनील कुमार॥ जब पूरा हिंदुस्तान सामाजिक मोर्चे पर तरह-तरह की नकारात्मक और निराशाजनक खबरों से घिरा हुआ है, तब एक अच्छी खबर यह आती है कि शिक्षकों का एक संगठन स्कूल छोड़ चुके बच्चों की स्कूलवापिसी का अभियान शुरू करने जा रहा है। इसके बिना देश में ऐसा अंधकार छाया हुआ है कि लोग तरह-तरह से धर्म बदलवाकर घरवापिसी का अभियान चला रहे हैं, और पिछले सैकड़ों-हजारों बरसों के इतिहास को इस तरह वापिस घुमा देना चाहते हैं मानो दुनिया की जिंदगी एक दीवारघड़ी हो और उसके कांटों को घुमाकर हजार बरस पहले ले जाया जा सकता है। लोग कुदरत...

सत्ता तो बददिमाग़ हुए बिना रह भी गई होती, चापलूसों ने गर रहने दिया होता तो..

सत्ता तो बददिमाग़ हुए बिना रह भी गई होती, चापलूसों ने गर रहने दिया होता तो..

-सुनील कुमार॥ अखबारों में काम करने वाले जूनियर रिपोर्टरों की भाषा सुनें तो वे पुलिस या सरकारी महकमे की जुबान बोलने लगते हैं। वीआईपी की लोकेशन, मिनट 2 मिनट मूवमेंट, वीवीआईपी इंतजाम जैसे शब्द उनके मुंह से भी झड़ते हैं, और उनकी कलम या उनके कीबोर्ड से भी। दरअसल सरकारी अमले के साथ काम करते हुए लोगों की सोच भी उसी तरह की हो जाती है जिस तरह मुजरिमों के साथ काम करते हुए पुलिस की सोच मुजरिमों जैसी होने लगती है, और पुलिस में से बहुत से लोगों को जुर्म करने में कुछ अटपटा नहीं लगता है। अखबार और...

आप की निकृष्ट सोच..

आप की निकृष्ट सोच..

अन्ना आंदोलन को सीढ़ी बनाकर अरविंद केजरीवाल ने सत्ता की मंजिल बहुत जल्दी हासिल कर ली। उन्होंने लीक से हटकर राजनीति का दावा करते हुए जो पार्टी बनाई, उसे आम आदमी पार्टी नाम दिया। इस नाम से जनता के साथ जुड़ाव का एहसास होता है। एक ऐसा दल जो आम लोगों का है, यानी जिसके कर्ता-धर्ता उस अभिजात्य वर्ग से अलग होंगे, जो भारत के बड़े राजनैतिक दलों की खास पहचान बन चुके हैं। अपनी राजनीति के शुरुआती दौर में अरविंद केजरीवाल बाहर निकली हुई शर्ट, स्वेटर, मफलर, और मारुति कार में सफर करते हुए आम आदमी की तरह ही...

देश में मुस्लिम विरोधी उन्माद उफान पर, कोई सुनवाई नहीं..

देश में मुस्लिम विरोधी उन्माद उफान पर, कोई सुनवाई नहीं..

-सुनील कुमार॥ मध्य प्रदेश से गुजर रही अजमेर जा रही एक मुसाफिर रेलगाड़ी में सफर कर रहे एक मुस्लिम आदमी और उसकी पारिवारिक परिचित एक हिंदू शादीशुदा महिला को बजरंग दल के लोगों ने ट्रेन से घसीटकर उतारा और उज्जैन रेलवे स्टेशन पर पुलिस के हवाले किया। उनका आरोप था कि यह लव जिहाद का मामला है। दूसरी तरफ जब पुलिस ने दरयाफ्त की तो पता लगा कि दोनों परिवार एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं, और दो परिवारों के ये लोग सिर्फ साथ में सफर कर रहे थे। लंबी पूछताछ के बाद बयान दर्ज करके पुलिस ने इन लोगों...

धार्मिक उन्माद का शिकार समाज..

धार्मिक उन्माद का शिकार समाज..

देश में सांप्रदायिक विद्वेष और धार्मिक असहिष्णुता इस तरह अपनी जड़ें गहरी कर चुकी है कि अब इससे समूचे देश का भविष्य खतरे में नजर आने लगा है। भारत की हस्ती बाकी देशों से अलग इसलिए मानी गई क्योंकि यहां सभी धर्मों, जातियों और वर्णों के लोग तमाम असमानताओं के बावजूद दूध-चीनी की तरह मिलकर रहे। यह केवल किताबी बातें नहीं हैं, बल्कि कुछ समय पहले तक यही माहौल देश का सच था। धार्मिक, जातीय दंगे-फसाद तो हमेशा होते रहे, लेकिन उनका असर सीमित रहा। जो दुखद घटनाएं अतीत में हुईं, उन्हें समाज पर दाग की तरह देखा गया। इन...

मजाक को समझने का मिजाज..

मजाक को समझने का मिजाज..

-सर्वमित्रा सुरजन॥ हिंदुस्तान के महान कार्टूनिस्ट शंकर ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर कम से कम चार हजार कार्टून बनाए और बेदर्दी से उन पर तंज कसे। नेहरूजी का इस बारे में एक वाक्यांश भी काफी चर्चित है कि शंकर मुझे मत बख्शना। दरअसल यह लोकतांत्रिक मिजाज है, जिसमें खुद पर बने कार्टून पर हंसने-मुस्कुराने का माद्दा पैदा होता है। लेकिन मौजूदा निजाम में यह सहनशीलता कहीं नजर नहीं आती। सोमवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री के साथ एक दुर्घटना हो गई। किसी तकनीकी व्यवधान के कारण उनका भाषण बीच...

झाड़ू की चुनौती न समझने वाले अपने दम्भ समेत विपक्ष में रहें..

झाड़ू की चुनौती न समझने वाले अपने दम्भ समेत विपक्ष में रहें..

-सुनील कुमार॥ हिंदुस्तान की राजनीति में कोई सवा सौ साल से अधिक पुरानी कांग्रेस पार्टी आज अपनी जमीन बचाने के लिए रात-दिन एक कर रही है और खून-पसीना एक कर रही है, फिर भी उसके चुनावी आसार छत्तीसगढ़ जैसे एक-आध राज्य में तो मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन इसके बाहर बाकी तमाम राज्यों में मजबूर दिख रहे हैं। ऐसे में जब पंजाब में अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने के दो दिन के भीतर आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल गोवा में अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित करते हैं तो भारत की राजनीति को लेकर कुछ बुनियादी...

बीवी से बलात्कार करके भी बलात्कार की सजा से छूट किस किस्म का लोकतंत्र.?

बीवी से बलात्कार करके भी बलात्कार की सजा से छूट किस किस्म का लोकतंत्र.?

-सुनील कुमार॥ दिल्ली हाई कोर्ट में एक मुकदमा चल रहा है जिसमें शादीशुदा जोड़ों के बीच पति द्वारा पत्नी पर किए गए बलात्कार पर बलात्कार की सजा का प्रावधान न होने को चुनौती दी गई है। भारत के कानून में धारा 375 के तहत यह खास छूट दी गई है कि अगर पति अपनी पत्नी से जबरदस्ती सेक्स करता है और पत्नी की उम्र 15 वर्ष से अधिक है तो इसे बलात्कार में नहीं गिना जाएगा। भारत की महिला आंदोलनकारी, और दूसरे तबके लगातार इस छूट को हटाने की बात कर रहे हैं और उनका यह मानना है कि शादी...

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