सिपाहियों को गुलामगिरी से बचाएं राज्य सरकारें..

सिपाहियों को गुलामगिरी से बचाएं राज्य सरकारें..

-सुनील कुमार॥ मद्रास हाईकोर्ट ने चार दिन पहले राज्य के बड़े पुलिस अफसरों के घरों पर तैनात किए गए पुलिस के निचले दर्जे के कर्मचारियों को गुलामीप्रथा करार देते हुए फटकार लगाई है। अदालत इसके खिलाफ पहले भी कड़ा आदेश कर चुकी है, लेकिन इसका कोई असर सरकार और अफसरों पर नहीं हुआ। सरकारी वकील ने कहा कि अदालत के पिछले आदेश के बाद 19 पुलिस कर्मचारियों को अर्दली ड्यूटी से मुक्त किया गया है, लेकिन जज ने कहा कि इसके बाद भी बड़ी संख्या में छोटे स्तर के पुलिस कर्मचारी बड़े अफसरों के बंगलों पर तैनात हैं। अदालत ने...

आजादी के अमृत महोत्सव का अमृत किसे, और विष किसे.?

आजादी के अमृत महोत्सव का अमृत किसे, और विष किसे.?

-सुनील कुमार॥ आज जब पूरा हिन्दुस्तान तिरंगे झंडे को लहराते हुए घूम रहा है, और कल आजादी की 75वीं सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहा है, उस वक्त राजस्थान के जालौर में इंटरनेट बंद किया गया है। आमतौर पर साम्प्रदायिक घटनाओं को लेकर देश में जगह-जगह ऐसी नौबत आती है, लेकिन जालौर में तो हिन्दुओं के बीच ही ऐसी नौबत आई है। वहां के एक निजी स्कूल में 9 बरस के एक दलित बच्चे ने मास्टर छैलसिंह की अलग रखी हुई मटकी से पानी पी लिया, तो मास्टर ने उसे मार-मारकर जख्मी कर दिया, और तीन हफ्ते बाद इन्हीं जख्मों...

रुश्दी पर हमला, दुनिया के लिए कई सवाल खड़े…

रुश्दी पर हमला, दुनिया के लिए कई सवाल खड़े…

-सुनील कुमार॥ भारत में जन्मे और पश्चिम में बसे विख्यात लेखक सलमान रुश्दी पर कल अमरीका के न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के मंच पर एक नौजवान ने जाकर चाकू से हमला किया, और बुरी तरह जख्मी कर दिया। रुश्दी लंबे समय से मुस्लिम या इस्लामी आतंकियों के निशाने पर थे। उनकी एक किताब ‘सैटेनिक वर्सेज’ पर 1988 में ईरान ने उनकी मौत का फतवा जारी किया था, जो कि ईरान के सत्तारूढ़ धार्मिक मुखिया की तरफ से सार्वजनिक रूप से दिया गया था। इस किताब को मोहम्मद पैगंबर का अपमान करार दिया गया था, और रुश्दी के कत्ल पर दसियों...

कोई अच्छी बात भी लोकतंत्र में जबरिया कैसे लादी जा सकती है.?

कोई अच्छी बात भी लोकतंत्र में जबरिया कैसे लादी जा सकती है.?

-सुनील कुमार॥ आजादी की 75वीं सालगिरह पर भारत सरकार ने हर घर तिरंगा नाम का एक अभियान शुरू किया है, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी अपने स्तर पर भी अधिक से अधिक घरों में तिरंगा पहुंचाने की घोषणा के साथ कुछ कोशिश कर रही है। रेलवे के करोड़ों कर्मचारियों को बाजार भाव से काफी अधिक दाम पर अनिवार्य रूप से तिरंगा झंडा खरीदने के लिए कहा जा रहा है, जिसे लेकर विरोध भी हो रहा है, और लोग यह हिसाब भी पोस्ट कर रहे हैं कि ठेकेदार को इससे कितने करोड़ की कमाई होने जा रही है।...

ऐसे घटिया शक्तिमान की खटिया खड़ी क्यों न हो.?

ऐसे घटिया शक्तिमान की खटिया खड़ी क्यों न हो.?

-सुनील कुमार॥ मुम्बई फिल्म उद्योग के एक बहुत ही औसत दर्जे के अभिनेता मुकेश खन्ना का नाम बच्चों के लिए बनाए गए शक्तिमान नाम के एक किरदार से जुड़ा हुआ था, और एक वक्त था जब छत्तीसगढ़ में स्कूलों का जाल बिछाने वाले, और साथ-साथ अखबार चलाने वाले एक जालसाज ने मुकेश खन्ना को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर दसियों हजार मध्यमवर्गीय मां-बाप को लूटा था। ऐसे मुकेश खन्ना ने अभी एक गंदा बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है- कोई भी लडक़ी अगर किसी लडक़े को कहे कि मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हूं तो वो लडक़ी लडक़ी नहीं है,...

नीतीश के बाहर आने से अब सबसे बड़ी दुविधा कांग्रेस की..

नीतीश के बाहर आने से अब सबसे बड़ी दुविधा कांग्रेस की..

-सुनील कुमार॥ बिहार में कल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस तरह एनडीए को छोडक़र और मुख्य विपक्षी लालू यादव और कांग्रेस से हाथ मिलाकर नई सरकार बनाने का रास्ता बना लिया है, वह पिछले दो दिनों का सबसे बड़ा भूचाल रहा। कांग्रेस ने इस मौके पर पिछली बार के नीतीश के साथ के गठबंधन की तरह बिना शर्त नीतीश का समर्थन करने की घोषणा की है, और हर विधायक के समर्थन के जरूरत आज इस नई गठबंधन सरकार को होगी। लेकिन इसके पहले कि नीतीश कुमार एक बार और शपथ लें, या सरकार बनाएं, उसके पहले ही उनके समर्थकों ने...

आदिवासी दिवस का पाखंड खत्म करने की जरूरत, और एक लंबी लड़ाई लडऩे की भी

आदिवासी दिवस का पाखंड खत्म करने की जरूरत, और एक लंबी लड़ाई लडऩे की भी

-सुनील कुमार॥ आज 9 अगस्त को दुनिया भर में मूल निवासियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। हिन्दुस्तान में इन्हें आदिवासी कहा जाता है, लेकिन एक राजनीतिक सोच इस शब्द के खिलाफ है, और वह इन्हें वनवासी कहने पर अड़ी रहती है। खैर, आज की चर्चा इस छोटी सोच से परे की है, और आदिवासियों के मुद्दे पर इस सीमित जगह में एक व्यापक बात करने के लिए है। 1994 में संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर दुनिया भर में बिखरी आदिवासियों या मूल निवासियों की दुनिया के अस्तित्व को मान्यता देने के हिसाब से, उनका सम्मान करने के...

बुलडोजर के मुकाबिल लेखनी

बुलडोजर के मुकाबिल लेखनी

शीश झुकाने को कहते हैं क्या कह दें।पैर दबाने को कहते हैं क्या कह दें।।फेंक रहे हैं जाल प्रलोभन का हम पर,आग लगाने को कहते हैं क्या कह दें।मर कर और मार कर बेबस लोगों को,धर्म बचाने को कहते हैं क्या कह दें। या फिर ग़रीबों का बजट है या कसाई का गंडासा है।सभी की गर्दनें काटीं हताशा ही हताशा है।।बड़ी उम्मीद थी इनसे मिलेंगी सब्ज सुविधाएं,मगर इन जेबकतरों से मिली ख़ाली निराशा है।रियायत दी गई सारी बड़े उद्योगपतियों को,बजट में प्यार उन पर ही लुटाया बेतहाशा है।। सरल भाषा में देश की, आम आदमी की तकलीफों और सत्ता की...

गलत कानून का बनना और कानून के गलत इस्तेमाल के खतरे…

गलत कानून का बनना और कानून के गलत इस्तेमाल के खतरे…

-सुनील कुमार॥ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कल देश में बलात्कार की घटनाओं पर कहा है कि 2012 में निर्भया गैंगरेप के बाद कानून में हुए बदलाव की वजह से बलात्कार के बाद हत्या के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि जब से कानून बदलकर बच्चियों से रेप करने वाले को फांसी की सजा देने का प्रावधान किया गया है तब से हत्याएं ज्यादा होने लगी हैं। उन्होंने कहा कि बलात्कारी जब देखता है कि पीडि़ता उसके खिलाफ कल गवाह बन जाएगी, तो वो रेप भी करता है, और बच्चियों की हत्या भी कर देता है। जिस...

अमृतकाल में महिला उत्पीड़न का जहर

अमृतकाल में महिला उत्पीड़न का जहर

पिछले कुछ दिनों में महिला उत्पीड़न से जुड़ी तीन-चार खबरें आई हैं, जो बेहद व्यथित करने वाली हैं। संयोग ये है कि इन तमाम खबरों का संबंध उत्तरप्रदेश से है। हालांकि इन खबरों का विश्लेषण राज्य की सीमाओं से परे जाकर समग्रता में करने की जरूरत है, क्योंकि महिलाओं की स्थिति हर जगह एक जैसी ही है। इस वक्त जिसे आजादी का अमृतकाल कहा जा रहा है, उसमें देश की आधी आबादी के लिए अमृत का कोई कतरा है या नहीं, इस पर भी विचार करने की जरूरत है। अभी 15 अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री मोदी क्या भाषण देंगे,...

पड़ोसियों की छोटी-छोटी बातों से सबक की जरूरत..

पड़ोसियों की छोटी-छोटी बातों से सबक की जरूरत..

-सुनील कुमार॥ लोकतंत्र जब कमजोर होता है, तो कई तरफ से होने वाले हमलों की वजह से कमजोर होता है, किसी एक वजह से नहीं। हिन्दुस्तान और पाकिस्तान एक ही दिन दो आजाद मुल्क बने थे, और हिन्दुस्तान अभी कुछ बरस पहले तक लोकतंत्र के पैमानों पर एक मजबूत देश माना जाता था। हाल के बरसों में इस देश में लोकतांत्रिक ढांचा बुरी तरह कमजोर हुआ है, लेकिन फिर भी जब कभी पड़ोस के पाकिस्तान से इसकी तुलना की जाती है तो यह एक बेहतर, और एक अधिक विकसित लोकतंत्र दिखता है। दरअसल लोगों की नजरों में आर्थिक विकास और...

75वीं सालगिरह के मौके पर असली आजादी तो यह हो सकती है…

75वीं सालगिरह के मौके पर असली आजादी तो यह हो सकती है…

-सुनील कुमार॥ एक-एक करके देश के सभी बड़े अखबारों ने इस बात पर रिपोर्ट छाप ली है कि बस्तर में किस तरह करीब सवा सौ बेकसूर आदिवासियों को एनआईए ने नक्सल आरोपों में पांच बरस तक जेल में सड़ाए रखा, और अदालत से उनकी जमानत तक नहीं हो सकी क्योंकि वे सब बहुत गरीब थे। अब जब ये इतने बरस बाद लौटकर जिंदगी का सामना कर रहे हैं, तो रोज कमाने-खाने वाले लोगों के न रहने से परिवारों का जो हाल हुआ है, वह पता लग रहा है। और यह हाल आदिवासी इलाकों से बाहर शहरी इलाकों में और अधिक...