खलनायक बना दिए गए गहलोत ने कुछ अलोकतांत्रिक तो नहीं किया..

खलनायक बना दिए गए गहलोत ने कुछ अलोकतांत्रिक तो नहीं किया..

सार्वजनिक जीवन में एक चूक, या एक गलत काम लोगों को आसमान से धरती पर पटक सकते हैं, नायक को खलनायक बना सकते हैं, और ऐसा ही कुछ अशोक गहलोत के साथ हुआ। राजस्थान के मुख्यमंत्री इतने ताकतवर माने जा रहे थे, उनका लंबा तजुर्बा और सोनिया परिवार के प्रति उनकी बेदाग वफादारी ने उन्हें चौथाई सदी बाद पहले गैरगांधी कांग्रेसाध्यक्ष के लायक बनाया था। सोनिया परिवार ने अपने तीन लोगों से बाहर जाकर गहलोत को पार्टी अध्यक्ष बनाना तय किया था, और उन्हें एक किस्म से इस जिम्मेदारी के लिए बाकी किसी भी कांग्रेस नेता के मुकाबले अधिक सही...

मौतें यूपी में हुईं, लेकिन क्या देश बेहतर?

मौतें यूपी में हुईं, लेकिन क्या देश बेहतर?

-सुनील कुमार उत्तरप्रदेश के कानुपुर में एक मंदिर से मुंडन कराकर लौट रहे लोगों की ट्रैक्टर-ट्रॉली एक तालाब में जा गिरी, और 27 लोग मारे गए। ट्रैक्टर चला रहे आदमी के बेटे का ही मुंडन था, और तमाम लोग रिश्तेदार और करीबी लोग थे। मुंडन से लौटते हुए रास्ते में सभी ने शराब पी थी, और ड्राइवर खुद नशे में अंधाधुंध रफ्तार से ट्रैक्टर-ट्रॉली दौड़ा रहा था। अब जब हादसा हो ही गया है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल सिर्फ सामान ढोने के लिए होना चाहिए, और अगर इसमें लोगों को ढोया गया तो...

धर्म को संविधान दिखाया तो भडक़ उठे धर्मान्ध, दलित व्याख्याता बर्खास्त..

धर्म को संविधान दिखाया तो भडक़ उठे धर्मान्ध, दलित व्याख्याता बर्खास्त..

-सुनील कुमार उत्तरप्रदेश के वाराणसी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के एक अतिथि व्याख्याता मिथिलेश गौतम को विश्वविद्यालय ने उनकी एक फेसबुक पोस्ट पर खड़े-खड़े बर्खास्त कर दिया है, और विश्वविद्यालय के अहाते में उनके घुसने पर रोक लगा दी है। मिथिलेश गौतम ने लिखा था- महिलाओं को नौ दिन के नवरात्र व्रत से अच्छा है कि नौ दिन भारतीय संविधान और हिन्दू कोड बिल पढ़ लें, उनका जीवन गुलामी और भय से मुक्त हो जाएगा, जय भीम। नाम और जय भीम इन दोनों से यह जाहिर है कि मिथिलेश गौतम दलित समाज के दिखते हैं, और उन्होंने हिन्दू धर्म...

SC के एक फैसले ने महिलाओं के दो तबकों को दी शानदार मजबूती…

SC के एक फैसले ने महिलाओं के दो तबकों को दी शानदार मजबूती…

-सुनील कुमार।। किसी भी विकसित लोकतंत्र में सुप्रीम कोर्ट को आम लोग एक अदालत मान लेते हैं। दरअसल यह बहुत से जजों की अलग-अलग, और मिलीजुली कई किस्म की अदालतें का एक समूह होता है जिसका फैसला वैसा ही हो सकता है जैसा कि उसे लिखने वाले जज हों। किसी एक वक्त में एक मामला एक जज से एक किस्म का फैसला पा सकता है, और अगर वह किसी दूसरे जज के सामने पड़ा होता, तो हो सकता है कि फैसला उसका ठीक उल्टा भी होता। और हर मामले में ऐसी पुनर्विचार याचिका की गुंजाइश नहीं होती कि एक जज...

सोशल मीडिया की वजह से पुरानी बातें हमेशा गूंजते रहने का खतरा..

सोशल मीडिया की वजह से पुरानी बातें हमेशा गूंजते रहने का खतरा..

-सुनील कुमार।। पिछले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्मदिन अभी गुजरा, तो बिना हो-हल्ले के चले गया। उनके प्रशंसकों में से कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी कही यह बात याद दिलाई कि उन्हें उम्मीद है कि इतिहास उनके साथ अधिक रहमदिल रहेगा। यह बात मनमोहन सिंह ने अपने कटु आलोचकों की बातों के जवाब में कही थीं। ऐसे आलोचकों का अधिकांश हिस्सा इस बात के लिए उनका सबसे बड़ा आलोचक रहता था कि वे कम बोलते थे, धीमा बोलते थे, साधारण जुबान बोलते थे, दावे नहीं करते थे, और सपने तो बिल्कुल ही नहीं दिखाते थे। इन बातों की...

भगत सिंह से देवरस को ‘बचाने’ के लिए हेडगेवार ने हफ़्ते भर समझाया था..

भगत सिंह से देवरस को ‘बचाने’ के लिए हेडगेवार ने हफ़्ते भर समझाया था..

-शम्सुल इस्लाम।। आजकल RSS और उससे जुड़े संगठन भगत सिंह और तमाम दूसरे क्रांतिकारियों का नाम बड़े ज़ोर-शोर से लेते है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि आज़ादी की यह क्रांतिकारी धारा जिस भारत का सपना देखती थी, RSS उससे बिलकुल उलट देखता है. भगत सिंह मज़दूरों का समाजवादी राज स्थापित करना चाहते थे और पक्के नास्तिक थे. RSS के संस्थापक डॉ. हेडगवार ने उस समय स्वयंसवेकों को भगत सिंह के प्रभाव से बचाने के लिए काफ़ी प्रयास किया. यही नहीं, आगे चल कर दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर ने भी भगत सिंह के आंदोलन की निंदा की. पढ़िये यह महत्वपूर्ण लेख―..“जब भगत...

चुनावी लाभ के फैसले ही तो रेवड़ी है..

चुनावी लाभ के फैसले ही तो रेवड़ी है..

केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में कुछ अहम फैसले लिए गए हैं, जिनका संबंध सत्तारुढ़ दल को चुनावी लाभ पहुंचाने से हो सकता है। इसके साथ ही निजीकरण की प्रक्रिया को तेज कर उद्योगपतियों को मुनाफा पहुंचाने का इरादा भी इन फैसलों में दिखता है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को 30 सितंबर के बाद भी लागू रखने का फैसला लिया है। पाठकों को याद होगा कि 2 साल पहले कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में यह योजना पेश की गई थी ताकि रोजगार से वंचित लोगों को भुखमरी का शिकार होने से बचाया जा सके।...

अतिवाद अतिवाद और भारत

अतिवाद अतिवाद और भारत

सर्वमित्रा सुरजन हमारे संविधान को रचा ही इस तरह से गया है कि यहां सभी श्रेणियों के लोगों को बराबरी और सम्मान से जीने का हक मिले और अनेकता में एकता की हमारी खास पहचान अक्षुण्ण रहे। लेकिन इस अनेकता के भाव को मिटाते हुए हर बात में एक को ही सर्वोपरि करने की जो नयी परिपाटी चलाई गई है, उससे अतिवाद को पनपने का मौका मिल रहा है। एक की अति का जवाब दूसरे की अति नहीं हो सकती। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने पिछले सप्ताह पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई पर बड़ी कार्रवाई की थी। जिसके तहत...

अंतिम संस्कार पर सरकारी खर्च की विरोधी जनता ही जागरूक..

अंतिम संस्कार पर सरकारी खर्च की विरोधी जनता ही जागरूक..

जापान में जहां वहां की जनता जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के अन्तिम संस्कार पर किए जा रहे सरकारी सौ करोड़ के बड़े खर्च को फिजूल खर्ची मान कर उसका देश भर में भारी विरोध कर रही है और एक हम हैं कि हमारे प्रधानमंत्री द्वारा खुद पर किए जाने वाले सालाना हजारों करोड़ के ऐतिहासिक फ़िज़ूल खर्च को होते देख कर भी चुपचाप देखते रहते हैं और चूँ भी नहीं बोलते.. हमें जापान की जनता से यह भी सीखने की महत्ती आवश्यकता है.. -सुनील कुमार।। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया...

इंदिरा गांधी होती तो किसकी मजाल थी.?

इंदिरा गांधी होती तो किसकी मजाल थी.?

कृष्ण कल्पित।। हमारी बात का उस मिस पे कुछ का़बू नहीं चलताजहां बंदूक चलती है वहां जादू नहीं चलता ! अकबर इलाहाबादी कहते हैं कि जादू की भी एक सीमा होती है और अंतत: जादू झूठ पर आधारित होता है । जादू नज़रों का धोखा/फ़रेब होता है । मज़बूरी का नाम महात्मा गांधी तो सुना था लेकिन कांग्रेस आलाकमान इतना मज़बूर पहले कब था ? यह कांग्रेस आलाकमान की मज़बूरी ही है कि उसे अशोक गहलोत को क्लीन चिट देनी पड़ी है । इंदिरा गांधी होती तो अब तक सबकी बोलती बंद हो चुकी होती । जैसे कांग्रेस आलाकमान मज़बूर...

अब जादूगर ख़ुद एक साधारण दर्शक है !

अब जादूगर ख़ुद एक साधारण दर्शक है !

कृष्ण कल्पित।। मूर्ख सलाहकारों, महत्वाकांक्षी मंत्रियों और चाटुकार अफ़सरों के कारण जादूगर ने अपनी वह जादुई ‘सोनिया-छड़ी’ गंवा दी, जिससे वह जादू दिखाया करता था । इस आत्मघाती कृत्य को जापानी भाषा में हाराकिरी कहा जाता है । मैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का सलाहकार नहीं ! फिर भी मैं सलाह दे रहा हूं कि अशोक गहलोत को यदि अपनी (बचीखुची) साख बचानी है तो उन्हें तुरंत प्रभाव से शांति धारीवाल, महेश जोशी और प्रताप सिंह खाचरियावास को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए । एक कोई सुभाष गर्ग भी बताया जाता है, और भी कई हैं । उन्हें अपने सारे लालची,...

अंकिता भंडारी हत्याकांड से उपजा आक्रोश..

अंकिता भंडारी हत्याकांड से उपजा आक्रोश..

शकील अख्तर।। उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड पर आम लोगों, खासकर युवतियों का गुस्सा उसी तरह अब सरकार और प्रशासन के खिलाफ फूट रहा है, जैसा निर्भया कांड के वक्त देखा गया था। उस समय दिल्ली और केंद्र दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी और उसके खिलाफ माहौल बनाने की शुरुआत भाजपा समेत तमाम कांग्रेस विरोधियों ने कर ही दी थी। निर्भया कांड से इस विरोध को तेज करने का एक और मौका मिला और उसके बाद जनाक्रोश को कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए इस्तेमाल किया गया। हालांकि निर्भया मामले में कांग्रेस ने कार्रवाई करने में कोई...