महज़ अपनी खाल बचाता, आत्मकेंद्रित सुप्रीम कोर्ट

-सुनील कुमार॥सुप्रीम कोर्ट में कुछ कर्मचारियों के कोरोनावायरस निकलने के बाद जजों ने यह तय किया है कि वे अपने घरों से ही वीडियो कांफ्रेंस

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आपदा में उत्सव मनाना भी शग़ल.!

रोजाना एक लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को भर्ती होने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है और उसके बाद भी इलाज मिलने की कोई गारंटी नहीं है। अस्पतालों में वेंटिलेटर, दवाओं, आक्सीजन सिलेंडरों की भारी कमी है।

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अभूतपूर्व कोरोना और जड़ों से कटा प्रशासन..

-सुनील कुमार॥ छत्तीसगढ़ में अंधाधुंध रफ्तार से कोरोना बढ़ रहा है वह लोगों के लिए तो फिक्र की बात है ही, लेकिन वह शासन और

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उस दिन बंधन टूटे, बेड़िया टूटी..

महाराष्ट्र के पुणे में पहली मर्तबा लड़किया स्कूल की देहरी चढ़ी ! कोई 172 साल पहले उस दम्पति ने जब कन्या पाठशाला शुरू की ,

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चीनी नौजवानों से सीख वसीयत करें..

-सुनील कुमार॥ चीन की खबर है कि वहां लोग कोरोना के खतरे के चलते बड़ी संख्या में अपनी वसीयत रजिस्टर करवा रहे हैं। चीनी कानून

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टू बी ऑर नॉट टू बी, दैट इज द क्वेश्चन

कोरोना से आम आदमी डरा हुआ है, यह साफ नजर आ रहा है। और उसके इस डर का लाभ सरकारों को कई तरह के मनमाने फैसले थोपने के रूप में मिल भी रहा है। सरकार लगातार कोरोना से सावधान रहने की चेतावनी दे रही है। लेकिन क्या वह खुद सावधान है, या सरकार होने के कारण कोरोना उससे डर रहा है। असम में भाजपा नेता हेमंत बिस्व सरमा के बयान को सुनकर तो ऐसा ही लगता है। एक साक्षात्कार में उन्होंने साफ कहा कि असम में अभी कोरोना नहीं है और मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। अगर होगी, तो वे खुद बता देंगे। उनका कहना है कि मास्क पहनेंगे तो ब्यूटी पार्लर कैसे चलेंगे?

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लॉकडाऊन के भय के साथ बेबसी में घरवापिसी..

लॉकडाऊन से हिंदुस्तान जैसे सबसे गरीब मजदूरों वाले देश में करोड़ों लोगों के सामने भुखमरी से जरा ही कम बुरी नौबत आ रही है। आज 21वीं सदी में भी केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर भी लोगों को बस जिंदा रहने लायक अनाज दे पा रही हैं, पिछले बरस तो हजार-हजार किलोमीटर का वापिसी-सफर भी मजदूरों को पैदल ही तय करना पड़ा था। इस देश के बड़े-बड़े राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थानों से निकले हुए गे्रजुएट नौजवान दुनिया की सबसे बड़ी कई कंपनियों को संभाल रहे हैं। अगर सरकारों में राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो ऐसी कोई वजह नहीं है कि ऐसे प्रबंधन-विशेषज्ञ जानकार लोग इस देश के प्रवासी मजदूरों के लायक कोई कामयाब योजना न बना सकें। कोई प्रदेश भी ऐसी पहल कर सकता है, और केंद्र सरकार को तो करना ही चाहिए। आगे-आगे देखें कि किसके मन में कितना दर्द है।

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नीयत का सवाल अहम है कोरोना काल में..

कोरोना की दूसरी लहर देश में सुनामी की तरह आ चुकी है। और लॉकडाउन का डर फिर दिखने लगा है। बल्कि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में अलग-अलग तरह से लॉकडाउन लगने भी लगा है..

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जब सरकार ही अपराध करने लगे..

-सुनील कुमार॥ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभी उत्तरप्रदेश की योगी सरकार के घोर साम्प्रदायिक दिखने वाले दर्जनों मामलों को खारिज करते हुए सरकार को बुरी तरह

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‘खेला’ ही तो हो रहा है जैसे..

प.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले शनिवार को तारकेश्वर इलाके की एक चुनावी जनसभा में अल्पसंख्यकों से अपील की थी कि वे अपना वोट

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राफेल की उड़ान पर फिर उठे सवाल..

भारतीय वायुसेना के बेड़े में अब तक 14 जंगी राफेल विमान शामिल हो चुके हैं। इसे भारत की बड़ी ताकत माना जा रहा है। लेकिन

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