राजा तिरीचन्द और टेढ़ापुर की अर्थव्यवस्था..

-सुधीन्द्र मोहन शर्मा॥ तो एक थे राजा तिरीचंद, और एक उनका राज्य था टेढ़ापुरकुछ दिनों से टेढ़ापुर राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ती ही जा रही थी.तो

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मातृ-पितृ दिवस नाम का पाखंड खत्म किया जाए..

-सुनील कुमार॥आज प्रेम का त्यौहार वेलेंटाइन डे है, और इसके लिए प्रेमी दिलों ने फूलों और तोहफों की तैयारी कर रखी है, दूसरी तरफ प्रेम

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मुझे लात मारने से पहले तीन डॉट..

-पंकज के. चौधरी॥ बरसों पहले की बात है। मैं एक सरकारी स्कूल में पढ़ रहा था। एक बार मैंने ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया यह टीचर

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रंगा सियार बन बैठा सम्राट ककुदुम ..

-राजीव मित्तल॥ एक समय की बात है. एक सियार किसी हादसे में घायल हो गया. कई दिन तक वह अपनी खोह में पड़ा रहा..जब ठीक

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भाषा फ़ाँसी पर नहीं चढ़ती, चढ़ते हैं आप..

-अजित वडनेरकर॥ हिन्दी से खाने, कमाने और नाम हासिल करने वाले गाहे-ब-गाहे हिन्दी को बदनाम क्यों करते हैं ? मंगलेश डबराल को हिन्दी वाला होने

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एचआर तोताराम के चलते टाईम्स समूह का प्रस्ताव ठुकरा दिया..

-ओम थानवी।। 1984 की बात है। राजेंद्र माथुर नवभारत टाइम्स का संस्करण शुरू करने के इरादे से जयपुर आए। पहली, महज़ परिचय वाली, मुलाक़ात में

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गावस्कर का आत्मघाती मजाक खासा महंगा पड़ा

-सुनील कुमार।।हिन्दुस्तानी क्रिकेट के एक बड़े नामी-गिरामी और इज्जतदार भूतपूर्व खिलाड़ी, वर्तमान कमेंटेटर सुनील गावस्कर अपनी एक लापरवाह एक टिप्पणी को लेकर ऐसे बुरे फंसे

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नित्यानंद गायेन की एक कविता – राजा से हर मौत का हिसाब लेना चाहिए

नये भारत की सरकारमारे गए नागरिकों की गिनती नहीं करतीमने किसी सरकारी खाते और डेटाबेस मेंकोई रिकार्ड नहीं रखतीदरअसल आसान भाषा में समझ लीजिएकि सरकार

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