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बड़ी ही कुत्ती चीज है ये साली मीडिया भी… इससे तो बस सावधान रहने की जरूरत है

-धीरज भारद्वाज।।   छोटे बेटे की शादी है। हंगामे में नाचने-गाने और अपने छोटे भाई की पत्नी को आशीर्वाद देकर घर में उसका स्वागत करने के लिए उसके बड़े भाई के मौजूद रहने के भी पूरे आसार बन गए हैं। क्या हुआ जो बड़ा भाई सज़ायाफ्ता मुजरिम है? सज़ा भी किसी छोटे-मोटे अपराध की नहीं.. [...]

20-25 रुपये का पेट्रोल इधर-उधर गाड़ी पर छिड़क दो, चलानी नहीं, इसे आग लगानी है!

-के जी सुरेश।। स्कूल में पढ़ा था: प्यार “अंधा” होता है, और यह प्यार अगर सत्ता और कुर्सी के लिए हों, तो वह “बहरा”, “लूला” और “लंगड़ा” भी हो जाता है। भारत जैसे विशाल देश में जहाँ 120 करोड़ की आबादी, वैसे पांच साल तक चिल्लाती तो जरुर है, सरकार के खिलाफ, शासन के खिलाफ, सत्ता [...]

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कामचोरी, ऑफिस में देरी से पहुँचने और छूट्टी मारने के चार सौ बीस तरीके

-जेपी यादव|| ऑफिस से छुट्टी लेने का हुनर सबको नहीं आता, इसीलिए शातिर कर्मचारी तो अपने बॉस को आसानी से बेवकूफ बना लेते हैं और जिन्हें छुट्टी नहीं मिलती, वे होते हैं शराफत अली या फिर कोई सज्जन कुमार। इनके उलट दो होनहारों तेज प्रकाश और योग्य कुमार को ही ले लीजिए। ऑफिस में काम [...]

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हिंदी इज ए फन्नी लैंवेज.. तभी तो कन्फ्यूजियाए मुजप्परपुर के डॉगटर बाबू

हिंदी डे पर  खबर आई कि बिहार के मुजफ्फरपुर में डॉक्टरों ने एक मरीज के पैर की बजाय पेट का ऑपरेशन कर दिया। इमोशनल लोग प्रतिक्रिया में डॉक्टरों को गरियाने लगे, लेकिन मैं फौरन समझ गया कि गल्ती कहां हुई होगी। खा-म-ख्वाह डॉक्टर को गाली देने से समस्या का समाधान नहीं ढूंढा जा सकता। ये तो बढ़िया [...]

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कलियुग का नया तीर्थ- जेल, प्रथम पूज्य भगवान- रुपया और इकलौता धर्म- लूट

-कुंवर सत्यम|| एक नवीनतम वैज्ञानिक अध्ययन से सिद्ध हो चुका है कि नारद जी ने एक गुप्त वार्ता में विष्णु भगवान से एक कलियुगी रहस्य पर मंत्रणा की थी। नारद जी ने विष्णु जी से  जानना चाहा था “कि भगवान कलियुगी  लोगों का इच्छित तीर्थ कौन सा होगा? हे भगवान मेरी दूसरी शंका का भी समाधान [...]

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”काम करने से नहीं, चमचागिरी से बची रहती है नौकरी” हर ऑफिस का यही है फॉर्मूला

-जे पी यादव।। ‘मूंगफली तोड़नी नहीं और पगार छोड़नी नहीं’ के सिद्धांत पर चलने वाला कर्मचारी ही जीवन में सच्चे कामचोर का दर्जा पा सकता है। हालांकि इससे नुकसान होते हैं, लेकिन कामचोरी जैसे परम आनंद के आगे सबकुछ फीका पड़ जाता है। यही काम अगर बॉस की निगरानी, कहने का मतलब शागिर्दी में हो, [...]

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अन्ना हजारे और उनकी मंडली में आत्मविश्वास का केमिकल लोचा

-दिवांश ।। अन्ना हजारे ने जब जंतर मंतर से  पहली बार हुंकार भरी थी तब लोगों को लगा कि शायद अब देश को एक ऐसा इंकलाबी नेता मिल गया है जो कि देश के करप्शन को नेस्तनाबूत कर देगा। उस वक्त अन्ना एण्ड कम्पनी ने दावा किया था कि जनलोकपाल कानून बन जाने से हिन्दुस्तान [...]

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19 जून, जन्मदिन और राहुल गाँधी

आज राहुल गाँधी का जन्मदिन है। पिछले साल ‘राहुल जन्मदिवस’ पूरे रूआब के साथ मना था। हमारे शहर वाराणसी में भी ‘केक’ कटे थे। अख़बार के कतरन बताते हैं कि 10-जनपथ पर जश्न का माहौल था। लेकिन इस साल स्थितियाँ पलटी मारी हुई दिख रही हैं। राहुल गाँधी मीडिया-पटल से लापता हैं। उन्हें जन्मदिन की बधाईयाँ देने वाले [...]

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गब्बर सिंह: सादा जीवन उच्च विचार

सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता [...]

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