1857 में हुए भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक तात्यां टोपे और जलियांवाला बाग कांड का बदला लेने वाले शहीद-ए-आज़म उधम सिंह का नाम तो आज भी देश भर में बच्चे-बच्चे की जुबान पर है, लेकिन आजादी के लिए अपने तन-मन-धन का बलिदान कर देने वाले इन शहीदों के वंशज़ आज किस बदहाली में अपना जीवन गुजार रहे हैं, यह किसी ने सोचा तक नहीं है। करीब एक सदी तक चले स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे अनेकों क्रान्तिकारी थे जिनके परिवारवालों और वंशजों को किसी ने याद नहीं रखा। इन भूले-बिसरे परिजनों और वंशजों की बदहाली को मशहूर पत्रकार शिवनाथ झा एक फीचर फिल्म के माध्यम से बयां करने की तैयारी में हैं।
झा के मुताबिक “डिस्ग्रेसफुल” (अपमानजनक) नाम की इस फिल्म के माध्यम से भारत को आजादी दिलाने वाले ऐसे शहीदों, महापुरुषों और क्रान्तिकारियों के 30 वंशजों से बातचीत के आधार पर उन परिवारों की मौजूदा दुर्दशा को झलकाने का प्रयास किया जाएगा जिनके
पुरखो ने 1857 से 1947 तक चले स्वतंत्रता संग्राम में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। शिवनाथ झा ने मीडिया दरबार को बताया कि उन्होंने इस फिल्म की योजना 2009 में ही बना ली थी, लेकिन इसे अंजाम तक लाने में दो साल लग गए। इस से पहले वे अपनी पत्नी नीना झा के साथ मिलकर “आन्दोलन: एक पुस्तक से” नामक अभियान भी शुरू कर चुके हैं। झा के मुताबिक यह फिल्म भी उसी अभियान का एक हिस्सा है।
झा ने बताया की यह फिल्म उन 30 परिवारों के सदस्यों से बातचीत पर आधारित होगी जो स्वतंत्रता सेनानियों की मौजूदा पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और गुमनामी में बदहाल जीवन बिता रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन ने एक बार कहा था कि भुला दिए गए राष्ट्रनायकों के परिवारों को “राष्ट्रीय परिवार” का दर्जा दिया जाना चाहिए। फिल्म में उनकी इस भावना को भी आगे रखने का प्रयास किया जाएगा।.
झा दम्पति ने देश में संगीतकारों और कलाकारों के लिए तथा बुरे हाल में रह रहे शहीदों के वंशजों के पुनर्वास के मकसद से अपना आन्दोलन शुरू किया था जिसमे प्रयेक वर्ष एक किताब के माध्यम से ऐसे लोगों को पुनर्वासित करने का संकल्प रखा गया है। दोनों ने हाल ही में एक पुस्तक फॉर्गौटेन इंडियन हीरोज़ एंड मार्टियर्स: देयर नेग्लेक्टेड डिसेंडेंट्स – 1857-1947 का विमोचन किया और इस मौके पर शहीद-ए-आज़म उधम सिंह के पौत्र जीत सिंह को 11लाख 50 हजार रुपये की सहायता भी लोकमत समाचार पत्र समूह के मालिक विजय जे डरडा के हाथों प्रदान करवाया।
57 साल के जीत सिंह का ज़िक्र करते हुए झा ने बताया कि जलियांवाला बाग कांड के दोषी
अंग्रेज अधिकारी जनरल डायर से बदला लेने वाले शहीद उधम सिंह के इस वंशज को भुला दिया गया है और कितनी बड़ी विडम्बना है कि उनके पौत्र का परिवार मज़दूरी के दम पर चलता था।
झा ने स्वतंत्रता सेनानी तात्यां टोपे की चौथी पीढ़ी के वंशज विनायक राव टोपे का पता 2007 में लगाया था जो कि कानपुर के पास बिठूर में बदहाली में रह रहे थे। झा ने विनायक राव के पुनर्वास की दिशा में काम किया और उन्हें 5 लाख रूपए की आर्थिक मदद दिलाने के अलावे उनकी दो बेटियों को भारतीय रेल में नौकरी दिलवाने में भी सफल रहे। इसके अलावा झा दम्पत्ति ने भारत के अंतिम मुग़ल बादशाह और 1857 के विद्रोहियों के कमांडर-इन-चीफ बहादुर शाह ज़फ़र की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम के पुनर्वास के लिए भी काम किया था।
July 22, 2011 at 11:32 pm
सर ! आपके इस नेक काम के लिए दिल से शुभ कामनाएं देता हूँ . ये काम इस देश की सरकार को बहुत पहले करना चाहिए था . लेकिन ये आप जैसे नेक लोगो के माध्यम से हो रहा है ये ठीक रहेगा क्योंकि अगर सरकार इन देश भक्तो के वंशजो को मदद देती तो उसमे से भी ” खा ” जाती और यह सब गन्दी राजनीती की भेंट चढ़ जाता .
आपके लिए शुभकामनायें !
July 13, 2011 at 7:50 pm
आपके इस महान प्रयास को मेरी शुभकामनाएं.
July 12, 2011 at 10:07 am
aaj ke zamane hum ye bhi bhool gaye ki hum is dharti par itni azadi paa rehi hein un veer shahidon ke vajah se…….unki us pavitra atma ki vajah se….unki khoon ki balidan se…..lekin unke prayas ko bhulakar hum ye kaisi ran chuka rehi hein…..lekin mein ye pore bharat vasiyon ko kehna chahti hoon ki un veer yodhaon keliye itna prayas karne vale jha family ko saath dhena hi nahi balki unke koshishon ko uske nateja tak pahunjane mein madad karna chahiye…….yehin hum sabki kartavya hein….unhein azadi ke dinon mein yaad karna hi desh prem nahin……..
July 12, 2011 at 5:59 pm
शेरीन साहिबा, आपके जज्वात के लिए और हमारी कामना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. में तो चाणक्य के प्रदेश का ब्रह्माण हूँ, जो सोच लिया वह करूँगा ही, लोग साथ दें या नहीं. इतिहास किसी को माफ़ नहीं किया है और इतिहास दुहराता भी है..में एक कोशिश कर रहा हूँ बाकि भगवान शनि महाराज की कृपा.
July 13, 2011 at 9:30 am
ji…..sir aapki koshish zaroor kamyabi tak pahunjega…..aur bhagvan bhi aapke saat dhenge……
July 12, 2011 at 7:57 am
Jha Sahib ji 1857 se pehle bhi jo log azadi ke liye lare honge unh ke bare bhi khoj karni chahiye.
July 12, 2011 at 5:55 pm
दिल्लों साहिब, जब उनके वंसज ही उन्हें याद नहीं कर रहे है तो मेरे ऐसा “नाचीज” अकेले क्या करेगा. यह बात “दिल” से कह रहा हूँ, क्षमा करेंगे
July 12, 2011 at 7:30 am
Thanks MediaDarbar for giving us and our project “Aandolan:Ek Pustak Se” so much importance while the 121 crore people of this independent and sovereign India have forgotten the heroes and martyrs. We are trying our best to provide a “dignified” if not “luxurious” life to the descendants of forgotten heroes and martyrs for whom the them President of India had favoured for declaration of National Families. Thanks again.