पिछले का पता नहीं, अब एक और राहत पैकेज

पिछले का पता नहीं, अब एक और राहत पैकेज

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कोरोना की दूसरी लहर ने जैसी तबाही देश में मचाई है, उससे उबरने में न जाने कितना वक्त लगेगा। दूसरी लहर के दौरान जब स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, लोग इलाज के लिए तरस रहे थे, तब तो सरकार जनता की कुछ खास मदद नहीं कर पाई। लेकिन अब सरकार ने एक बार फिर राहत पैकेज का ऐलान किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के पैकेज में आठ राहत उपायों की घोषणा की है, जिनमें से चार ऐलान नए हैं। वित्त मंत्री ने कोरोना से प्रभावित सेक्टरों के लिए 1.1 लाख करोड़ रुपए की $कजर् गारंटी स्कीम का ऐलान किया है। इसके तहत वे उद्योग जो कोरोना से प्रभावित हुए हैं, बैंकों या दूसरे वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लेंगे तो केंद्र सरकार उसकी गारंटी देगी। इसके अलावा ‘आत्मनिर्भर भारत’ कार्यक्रम के तहत आपातकाल स्थितियों में उद्योगों को $कजर् लेने पर भी केंद्र सरकार उसकी गारंटी देगी। इस योजना के तहत 1.5 लाख करोड़ रुपए का इंतजाम किया गया है।

कजर् गारंटी स्कीम के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 50,000 करोड़ और दूसरे क्षेत्रों के लिए 60,000 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जो पैसे रखे गए हैं, उसके तहत अधिकतम 100 करोड़ रुपए का $कजर् लिया जा सकेगा। इस स्कीम के तहत ब्याज की अधिकतम दर 7.95 प्रतिशत है। केंद्र सरकार ने पिछले आत्मनिर्भर पैकेज में लाई गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को अब 31 मार्च 2022 तक बढ़ाते हुए इसके तहत अतिरिक्त 1.5 लाख करोड़ के $कजर् जारी करने का ऐलान किया है। कोरोना में लगभग मृतप्राय हो चुके पर्यटन उद्योग के लिए भी इस बार सहायता की घोषणा की गई है। जिसमें 11,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड टूरिस्ट गाइड्स, ट्रैवल और टूरिज्म के स्टेकहोल्डर्स को वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके तहत मान्यता प्राप्त गाइड्स को 1 लाख रुपए तक और मान्यता प्राप्त ट्रैवल और टूरिज्म के स्टेकहोल्डर्स को 10 लाख रुपए तक का 100 फ़ीसदी गारंटीड कर्ज मिलेगा। साथ ही विदेशी पर्यटकों को जब वीजा मिलना शुरू हो जाएगा, उसके बाद भारत आने वाले पहले पांच लाख पर्यटकों को टूरिस्ट वीजा मुफ़्त में दिया जाएगा।

कोरोना की पहली लहर में देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिरी थी। लॉकडाउन ने रोजगार पर गहरी चोट की थी और आज भी देश के निम्न मध्यमवर्गीय और गरीब तबके के लोग इस चोट से उबर नहीं पाए हैं। दूसरी लहर ने हालात और बिगाड़ दिए। रिजर्व बैंक के एक आकलन के मुताबिक, महामारी की दूसरी लहर से देश को करीब दो लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का नुकसान हुआ। वहीं इस बार कम से कम एक करोड़ लोग बेरोजगार हुए। सेंटर फॉर इंडियन इकॉनोमी के मुताबिक 97 प्रतिशत परिवारों की आय इस दौरान घट गई। इन हालात में कुछ उद्योग संगठनों ने सुझाव दिया था कि अप्रैल-मई में महामारी की दूसरी लहर से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार को तीन लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज देना चाहिए।

पिछले हफ्ते ही मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यम ने संकेत दिए थे कि सरकार अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन के लिए और उपाय कर सकती है। और आज वित्त मंत्री ने राहत पैकेज-2 की जानकारी देश को दी। इस बार सरकार का जोर स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और पर्यटन उद्योग पर है। इनके लिए जो घोषणाएं हुई हैं, उनसे त्वरित उत्साह तो नजर आएगा, लेकिन इसका दूरगामी असर कितना होगा, इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि इससे पहले भी सरकार ने 20 लाख करोड़ का भारी-भरकम राहत पैकेज घोषित किया था। तब एकबारगी ऐसा लगा था कि बाजार में 20 लाख करोड़ आ जाएंगे तो कारोबार को गति मिलेगी। लोगों के छूटे रोजगार वापस मिलेंगे। बाजार में क्रयशक्ति फिर से दिखने लगेगी। और जीडीपी में सुधार आएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

दरअसल सरकार ने पांच किश्तों में राहत पैकेज का ऐलान पिछले साल किया था, जिसमें पहले दिन 5.94 लाख करोड़ रुपये,  दूसरे दिन 3.10 लाख करोड़ रुपये, तीसरे दिन 1.5 लाख करोड़ रुपये, चौथे और पांचवे दिन 48,100 करोड़ रुपये के खर्च का ब्यौरा दिया। ये सारी रकम छोटे कारोबारियों, किसानों, मजदूरों से लेकर कोयला क्षेत्र, खनन, विमानन, अंतरिक्ष विज्ञान, शिक्षा, आदि के लिए थी। यानी इसमें त्वरित लाभ की गुंजाइश कम थी, दूर के ख्वाब ज्यादा थे। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 8,01,603 करोड़ रुपये के जिन उपायों का ऐलान किया था, उन्हें भी इसमें जोड़ दिया गया था और इस तरह 20 लाख करोड़ का पैकेज तैयार हुआ।

हकीकत में इसमें से कुछ लाख करोड़ रुपए ही सरकार ने खर्च किए, जैसे गरीबों के खाते में रकम डालना, मनरेगा का बजट बढ़ाना या कर्ज माफी करना। अगर वाकई में 20 लाख करोड़ रुपए की असल राहत देश को मिलती तो सरकार को अब तक 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने की नौबत नहीं आती। तब देश वाकई आत्मनिर्भर होता, जिसमें लोगों के पास रोजगार होता और उद्योग धंधे फल-फूल रहे होते। तब सरकार को राजकोष का घाटा पूरा करने के लिए सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में बेचना नहीं पड़ता, न ही तेल के दामों में ऐसी बेतहाशा वृद्धि की मजबूरी बतानी पड़ती। महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती गरीबी, आत्मनिर्भर अभियान वाले राहत पैकेज का हासिल अब तक यही है।

बहरहाल, सावन आने से पहले ही हरियाली दिखाने का इंतजाम सरकार ने कर लिया है। लेकिन आने वाला वक्त ही बताएगा कि हरियाली वाकई है या फिर किसी मृगतृष्णा में जनता को भटकाया जा रहा है।

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