और कितने पाकिस्तान.?

और कितने पाकिस्तान.?

Page Visited: 232
0 0
Read Time:8 Minute, 14 Second

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में एक महीने से भी अधिक वक्त से चल रहा तनाव अब बेहद गंभीर मोड़ पर जा पहुंचा है।

गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक टकराव के दौरान एक अफसर और दो सैनिक मारे गए। चीन के भी कुछ सैनिकों के मारे जाने की खबर है। 45 साल बाद दोनों देशों के बीच इस तरह की झड़प हुई है। इससे पहले साल 1975 में अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में पेट्रोलिंग के दौरान असम राइफल्स के चार जवान शहीद हो गए थे। हालांकि, दोनों देशों के बीच कोई बड़ा संघर्ष 1967 में सिक्किम में हुआ था। साल 1962 में भारत-चीन के बीच युद्ध के पांच साल बाद भारत ने सिक्किम में तकरीबन 400 चीनी सैनिकों को मार गिराया था। हालांकि, इस संघर्ष में भारत ने भी अपने 80 सैनिक खो दिए थे। एलएसी यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर दो परमाणु संपन्न देशों के बीच यह हिंसक तनाव दोनों देशों के साथ-साथ दुनिया भर के लिए चिंता का विषय है।  अब तक लद्दाख के तनाव की तुलना डोकलाम विवाद से की जाती रही है। तब दोनों देशों की सेनाएं 73 दिनों तक एक-दूसरे के सामने डटी हुईं थीं।

डोकलाम से पहले 2013 में डेपसांग और 2014 में चुमुर में भी विवाद हुआ था। लेकिन इस बार सीमा विवाद थोड़ा अलग है क्योंकि एक नहीं बल्कि कई स्थानों पर तनातनी चल रही है। पैंगोग त्सो लेक, लद्दाख में गलवान घाटी और गोगरा पोस्ट, सिक्किम में नाथू ला पास, इन सब पर विवाद है। कुछ स्थानों से चीन ने अपने सैनिक पीछे बुलाए हैं, लेकिन कल जिस तरह दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच झड़प हुई, उसमें अब चीन किस तरह अपने सैनिकों को वापस बुलाता है, यह देखना होगा।  सोमवार की इस घटना के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच सैन्य अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक हुई। इधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख, सीडीएस बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस.जयशंकर की बैठक भी हुई।

लेकिन इन बैठकों से इस तनाव का हल निकालने में कितनी मदद मिलेगी, यह कहना मुश्किल है। इससे पहले भी चीन के सैन्य अधिकारियों के साथ भारतीय सैन्य अधिकारियों की बैठक हो चुकी है और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर जोर दिया गया है। कल के तनाव के बाद भी बीजिंग ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारतीय सैनिकों ने सीमा पार कर चीनी सैनिकों पर हमला किया था। यानी चीन ने इस विवाद को भड़काने का इल्जाम भारत के सिर डाला।  हालांकि अब चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीनी विदेश मंत्री ने कहा है कि मौजूदा विवाद का हल बातचीत के जरिए होगा और इसके लिए दोनों देश तैयार हो गए हैं।

किसी भी विवाद का हल बातचीत से ही निकलना चाहिए, लेकिन उसके लिए साफ नीयत का होना भी जरूरी है, तभी विश्वास बहाली हो सकती है। फिलहाल चीन के मामले में हम इसकी कमी देख रहे हैं।  जानकारों का मानना है कि सर्वे ऑफ इंडिया के नए नक्शे में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में गिलगिट-बाल्टिस्तान और अक्साई चीन को दर्शाने और मौसम पूर्वानुमान में गिलगिट-बाल्टिस्तान को शामिल किए जाने से चीन चिढ़ गया है। इसके साथ कश्मीर में किया गया बदलाव भी चीन के चिढ़ने का एक कारण है। इसका संबंध पाकिस्तान से भी है।  दरअसल पाकिस्तान में चीनी दूतावास के एक अधिकारी वांग जियान फेंग ने एक ट्वीट किया है कि कश्मीर में यथास्थिति को एकतरफा बदलने और क्षेत्रीय तनावों को जारी रख चीन और पाकिस्तान की संप्रभुता को चुनौती दी है। और भारत-पाकिस्तान संबंधों और भारत-चीन संबंधों को और जटिल बना दिया है।

बेशक वांग के इस ट्वीट को चीन की आधिकारिक राय नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे इतना तय है कि चीन भारत के हरेक कदम पर पैनी नजर रख रहा है। मोदी सरकार के कश्मीर संबंधी फैसले पर देश में विपक्षी खुलकर आलोचना कर सकते हैं, यह उनका हक है। लेकिन चीन को यह हक नहीं है। गौरतलब है कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण गलवान इलाके पर चीन अपना दावा ठोंकता आया है। पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग और लद्दाख  की सीमा के साथ लगा हुआ यह इलाका 1962 की जंग के दौरान भी प्रमुख केंद्र रहा था। गलवान नदी (घाटी) क्षेत्र में तनाव के लिए चीन भारत को जिम्मेदार बताता है।

दरअसल भारत-चीन के बीच एक समझौता हुआ है कि एलएसी को मानेंगे और उसमें नए निर्माण नहीं करेंगे। लेकिन, चीन वहां पहले ही जरूरी सैन्य निर्माण कर चुका है और अब वो मौजूदा स्थिति बनाए रखने की बात करता है। अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अब भारत भी वहां पर सामरिक निर्माण करना चाहता है, तो चीन को यह खटक रहा है। हाल ही में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में चीनी सेना के हवाले से कहा गया है, ‘भारत ने इस इलाके में रक्षा संबंधी गैर-कानूनी निर्माण किए हैं। इसकी वजह से चीन को वहां सैन्य तैनाती बढ़ानी पड़ी है। भारत ने इस तनाव की शुरुआत की है।

लेकिन, हमें यकीन है कि यहां डोकलाम जैसे हालात नहीं बनेंगे जैसा साल 2017 में हुआ था। भारत कोविड-19 की वजह से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है और जनता का ध्यान हटाने के लिए उसने गलवान में तनाव पैदा किया।’ चीन ने सीधे-सीधे भारत सरकार की नीयत पर सवाल उठाएं हैं, जिसका माकूल जवाब मोदी सरकार को देना चाहिए। और हो सके तो चीन के साथ बढ़ी इस तनातनी का हल निकालने के लिए बजाय नेहरूजी को जिम्मेदार ठहराने के, विदेश नीति के जानकारों से चर्चा करनी चाहिए, फिर चाहे वे किसी भी दल के क्यों न हों।

(देशबन्धु)

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram