लॉक डाउन गरीबों के लिये भयावह त्रासदी..

Page Visited: 488
0 0
Read Time:4 Minute, 57 Second

-श्याम मीरा सिंह।।

देश में लॉकडाउन के बाद महानगरों की पुलिस ने बेघरों को पीटना शुरू कर दिया। उनसे सड़कों के फुटपाथ, नुक्कड़ खाली करवा लिए गए. और वापस गांव जाने के लिए फोर्स करना शुरू कर दिया। आपने सब्जी के बन्द ठेलों को भी गिराती पुलिस के वीडियोज देख ही लिए होंगे। फैक्ट्रियों में पल्लेदार का काम करने वाले, स्टेशनों पर माल गाड़ी का सामान उठाने वाले, कंस्ट्रक्शन साइटों पर काम करने वाले, सब्जी मंडियों में काम करने वाले हजारों मजदूरों से महानगरों को खाली करने का दबाव डालना शुरू कर दिया गया। लॉकडाउन के ऐलान के बाद हजारों मजदूर, बूढ़ी औरतें, बच्चे इन महानगरों में फंस गए, सड़क पर सोएं तो पुलिस पीटे। सड़क से चलें नुक्कड़ पर पहुंचे, बॉर्डर पर पहुंचे तो पुलिस पीटे। न शहर के अंदर रहने दिया जा रहा, न शहर से निकलने दिया जा रहा। गाय-भैंस, जानवरों की तरह पुलिस इनपर टूट पड़ रही है। एक परिवार नोएडा सेक्टर16 से चलकर कोटा, राजस्थान के लिए निकल पड़ा है। ये पूरी दूरी करीब 750 किमी की है। उस परिवार में दो बूढ़ी औरतें भी थीं, जिनकी उम्र 70 साल से लेकर 80 के बीच की थी। इन परिवारों के पास कपड़े-बर्तनों का सामान भी होता है। उस वजन को लेकर भी इन्हें साथ चलना पड़ रहा है। साथ में दुधमुंहे बच्चे भी हैं, उन्हें कंधों पर लेकर चलते चलते इन लोगों की आत्माएं जबाव देने लगी हैं।

दिल्ली से आने वाले सभी रास्तों पर इन लोगों के भीड़ मिल जाएगी। बहुत से लोग तो साइकिलों पर अपना सामान लादकर सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने गांव के लिए निकल पड़े हैं।

ये महामारी गरीब-कमजोर लोगों के लिए एक त्रासदी बनकर आई है. सरकार चाहती तो खाली पड़े स्टेडियमों, पार्कों, होटलों, स्कूलों, कालेजों में इनके रहने के लिए रेनबसेरे का इंतजाम कर सकती थी, लेकिन नहीं किया गया। प्रधानमंत्री ने बीते दिनों मध्यप्रदेश में सरकार बनाने में, नमस्ते ट्रम्प जैसे लग्जरी कार्यक्रमों में रुचि दिखाने की बजाय इन गरीब, मजदूर प्रवासियों पर ध्यान दिया होता तो ये आफत न आती।

ये हजारों प्रवासी सड़क पर चलते कुछ वाहनों की तरफ हाथ मारते हैं, निराश होते हैं, कोई इनके लिए अपनी गाड़ियां रोकने के लिए तैयार नहीं है। सड़कों पर कोई बस, ऑटो, रिक्शा कुछ भी नहीं चल रहा, हर रोज ये प्रवासी कुछ किलोमीटर चलते हैं, थकने लगते हैं तो सड़क पर ही लेट जाते हैं।

इस बीच एक जगह जेबर नाम के स्थान के पास कुछ ग्रामीणों ने इन आते-जाते प्रवासियों के खाने-पीने का इंतजाम करने की कोशिश की है। लेकिन कितने ही मजदूर प्रवासी वहां तक पहुंच जाएंगे ये कल्पना मुश्किल है।

मिडिल क्लास, अपर मिडिल क्लास और वर्क फ्रॉम होम वाली कौम को घर में दिन काटने के समय मीम्स सूझ रहे हैं लेकिन इनकी पीड़ाएं उसकी चिंताओं में शामिल नहीं। एक क्रिकेटर के अंगूठे में चोट लगने पर प्रधानमंत्री का ट्वीट आ जाता है, लेकिन हजारों थके हुए मजदूर, एक्सप्रेसवे की सड़कों पर कैसे अपनी रात काट रहे होंगे किसी को परवाह नहीं। प्रधानमंत्री को हर काम से क्लीन चिट देने वाली मिडिल क्लास कौन इन गरीब प्रवासियों की अपराधी हैं।

क्या दिल्ली, मुम्बई जैसे महानगरों में रहने का हक सिर्फ मिडिल क्लास, अपर मिडिल क्लास, एलीट क्लास का ही है? क्या ये शहर, मेट्रो के सामने पेन बेचने वालों, गुलाब बेचने वालों, समान ढोने वालों, मकान बनाने वाले मजदूरों का नहीं है? क्या गरीब होना सच में इतना बड़ा अपराध बन गया है?

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram