टू जी घोटाले के सभी आरोपी बरी..

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त्रिभुवन॥

एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का यह टू जी स्पैक्ट्रम घोटाला हुआ तो कांग्रेस की सरकार में था और इसके अपराधी बरी किए गए हैं भाजपा सरकार के शासन में। यही वह घोटाला था, जिस पर सवार होकर भाजपा सरकार सत्ता में आई थी और नरेंद्र मोदी पूरे देश में छाती ठोककर दहाड़ते फिरे कि मेरे कार्यकाल में कोई घोटाला हुआ तो बताओ।

लेकिन यह क्या छोटी बात है कि आप जिसे एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घोटाला बता रहे थे, उसका हर जिम्मेदार व्यक्ति आज आपके शासन में बरी हो गया है। आपकी सरकार ने अदालत में इतनी लचर पैरवी क्यों की कि घोटालेबाज छूट गए? क्या आप इसका जवाब देश की जनता को नहीं देंगे?

इस देश में अगर अदालतें और सीबीआई है तो वह कमज़ोर लोगों के लिए है। धनबल, व्यापार बल, सरकार बल, विपक्ष बल, राजनीतिक बल या चालूपुर्जा बल या दलाल बल वाले लोगों को क्या कोई इस देश में सज़ा दे सकता है? अगर कांग्रेस सरकार में बोफोर्स घोटाले के लोगों को बाकी सभी दल बचा सकते हैं तो गुजरात दंगों और दिल्ली दंगों के दोषियों को कोई कैसे जेल भेज देगा?

दरअसल भारत के महालेखाकार और नियंत्रक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर जो सवाल खड़े किए गए थे, वे आज भी जवाब मांग रहे हैं। इस देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि स्पेक्ट्रम घोटाले के इन्हीं सवालों पर सवार होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार असाधारण बहुमत से सत्ता में आई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 17 आरोपियों में 14 व्यक्ति और तीन कंपनियां (रिलायंस टेलिकॉम, स्वान टेलिकॉम, यूनिटेक) शामिल थीं।

उस समय सरकार इस घोटाले में घिरी तो उसने सफाई दी कि उन्होंने कंपनियों को नीलामी के बजाय “पहले आओ और पहले पाओ” की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक के अनुसार सरकारी खजाने को अनुमानित एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का नुक़सान हुआ था।

यह मामला सीबीआई में गया तो इस घोटाले के एक लाख 46 हजार करोड़ रुपए उड़ा दिए गए और लिहाजा सीबीआई ने 30 हज़ार करोड़ के नुकसान की बात कही। यह मामला जिस राजनीतिक धरातल पर उठा तो साफ़ माना गया कि लाइसेंस नीलामी के आधार पर दिए जाते तो ख़जाने को कम से कम एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए और हासिल हो सकते थे।

और अगर टू जी स्पैक्ट्रम में रिलायंस टेलीकॉम, स्वैन टेलीकॉम, यूनिटेक वायरलैस, लूप टेलिकॉम, लूप माेबाइल, एस्सार टेलीकॉम, एस्सार ग्रुप जैसी ताक़तवर कंपनियां हों आैर सिद्धार्थ बेहुड़ा तथा आरके चंदेलिया जैसे ब्यूरोक्रैट और संजय चंद्रा, उमाशंकर, गौतम दोषी, हरि नायर, सुरेंद्र पिपाड़ा, विनोद गोयनका, शाहिद बलवा, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, शरतकुमार, रवि रुइया, अंशुमान रुइया, विकास सराफ, करीम मोरानी आदि जैसे लोग हों तो किसका बाल बांका हो सकता है?

क्या यह बात सब लोग साल 2010 में ही लोग नहीं जानते थे, जब दूरसंचार मंत्री ए. राजा और कनिमोझी समेत सभी 17 लोगों को 2 जी घोटाले में आरोपी बनाया गया था। अाज अगर दिल्ली की अदालत ने इन्हें बरी कर दिया तो इससे भारतीय न्यायपालिका की छवि ख़राब नहीं हुई, बल्कि हमारी जांच एजेंसियों, हमारी सरकारों, हमारे लोकतंत्र के पहरुओं का अपराधियों ओर भ्रष्टाचारियों से प्रेम ही पुन: प्रकट हुआ है।

कुछ लोग इतने चालाक होते हैं कि वे रात के अंधेरे में अपराध करते हैं तो वे अंधेरे की तरफ लगी निगाहों पर अधिक रौशनी फेंककर अपने अपराध को सरअंजाम देते हैं।

झीने अंधेरे में अपराध करने वाले चालाक कुटिल लोग जानते हैं कि अपराध को छुपाने से बेहतर है कि देखने वाले की आंख की पुतलियों पर तेज रौशनी की धार फेंक दो।

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